इटावा में जाति विवाद: यादव कथावाचकों पर कोर्ट से वारंट, ब्राह्मणों पर हिंसा का आरोप
इटावा जिले की एक धार्मिक घटना ने जातीय पहचान और सामाजिक सौहार्द्र के मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। मामला दो यादव कथावाचकों – मुकुट सिंह यादव और संत सिंह यादव – से जुड़ा है, जिन्हें ब्राह्मण समुदाय के कुछ लोगों ने कथित रूप से इसलिए पीटा क्योंकि उन्होंने अपनी जाति छिपाकर धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया था। इस घटना ने न केवल समाज में तनाव पैदा किया, बल्कि अब इसका कानूनी पहलू भी सामने आ गया है।
इन दोनों कथावाचकों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी आधार कार्ड के सहारे ब्राह्मण पहचान के रूप में धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। इस आधार पर एसीजेएम कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इससे पहले उनकी अग्रिम जमानत की याचिका भी खारिज हो चुकी थी।
घटना 22 जून की है, जब कथावाचन कर रहे इन दोनों लोगों को ब्राह्मणों ने पीटा और उनका सिर मुंडवा दिया गया। इससे भी अधिक शर्मनाक बात यह रही कि उन्हें एक महिला के पैर पर नाक रगड़ने को मजबूर किया गया। इस अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार की चारों ओर निंदा हुई।
बाद में, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इन कथावाचकों को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया। इससे मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया। अब जबकि कोर्ट ने कथावाचकों के खिलाफ वारंट जारी किया है, सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जाति छिपाना बड़ा अपराध है या खुलेआम हिंसा करना?
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