छत्तीसगढ़ में स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था बदलेगी, सरकार ने शुरू किया ‘युक्तियुक्तकरण मिशन’
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के स्कूलों और शिक्षकों की तैनाती को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (यानी तर्कसंगत पुनर्व्यवस्था) की प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर दिया है। इस बार इसे और व्यवस्थित तरीके से करने के लिए एक संशोधित टाइम टेबल भी जारी किया गया है।
यह पूरा अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है। उद्देश्य साफ है—राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाना। सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
क्या है युक्तियुक्तकरण?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें स्कूलों और शिक्षकों का तर्कसंगत ढंग से पुनर्विन्यास किया जाता है। मतलब, जहां स्कूलों की संख्या या शिक्षक अनुपात असंतुलित है, वहां जरूरत के मुताबिक फेरबदल होगा।
प्रक्रिया के दो चरण होंगे:
1. पहला चरण: स्कूलों की पहचान और उनका पुनर्गठन (समायोजन)।
2. दूसरा चरण: अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत के हिसाब से दूसरी जगह पदस्थ किया जाएगा।
कब क्या होगा?
स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के लिए तय समय-सारिणी तैयार की गई है, ताकि हर काम तय समय पर पूरा हो और किसी तरह की लापरवाही न हो।
क्यों है ये ज़रूरी?
राज्य में कई स्कूलों में शिक्षक और छात्रों का अनुपात गड़बड़ है। कहीं शिक्षक ज्यादा हैं और छात्र कम, तो कहीं शिक्षक कम हैं और छात्र अधिक। इस असंतुलन को खत्म करने के लिए ही यह कदम उठाया गया है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
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