धर्मांतरण पर राजनीतिक घमासान: छत्तीसगढ़ में भूपेश और भाजपा आमने-सामने
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों धर्मांतरण एक बार फिर बहस का बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच इस विषय को लेकर तीखी बयानबाज़ी हो रही है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं और यह मुद्दा अब सियासी मोड़ ले चुका है।
भूपेश बघेल का आरोप है कि राज्य में सबसे अधिक धर्मांतरण भाजपा शासनकाल में हुए हैं। उनका कहना है कि जब भाजपा सत्ता में होती है, तब आदिवासी और कमजोर वर्गों के बीच धर्मांतरण की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। बघेल ने यह भी कहा कि भाजपा केवल प्रचार और आरोपों में माहिर है, जबकि असल मुद्दों पर काम करने से कतराती है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि भाजपा को धर्मांतरण रोकना है, तो वह ठोस कदम क्यों नहीं उठाती?
दूसरी ओर, भाजपा ने भूपेश बघेल के बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस के शासनकाल में जब भी किसी ने धर्मांतरण का विरोध किया, तो उसे दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय विरोध करने वालों पर लाठीचार्ज और हिंसा की घटनाएं आम थीं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा धर्मांतरण के मामलों को नजरअंदाज किया और वोटबैंक की राजनीति को प्राथमिकता दी।
यह विवाद सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं, वहां धर्मांतरण जैसे मुद्दे बहुत संवेदनशील होते हैं। इन समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक पहचान को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जब राजनीतिक दल इस विषय का इस्तेमाल एक-दूसरे पर हमला करने के लिए करते हैं, तो वह न केवल समाज को बाँटता है, बल्कि वास्तविक समस्याओं से ध्यान भी भटकाता है।
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