तोमर बंधुओं का कर्ज घोटाला: फर्जी लोन, लग्ज़री गाड़ियां और रायपुर में आतंक

Tomar brothers loan scam: Fake loans, luxury cars and terror in Raipur तोमर बंधुओं का कर्ज घोटाला: फर्जी लोन, लग्ज़री गाड़ियां और रायपुर में आतंक
 0
तोमर बंधुओं का कर्ज घोटाला: फर्जी लोन, लग्ज़री गाड़ियां और रायपुर में आतंक

तोमर बंधुओं का कर्ज घोटाला: फर्जी लोन, लग्ज़री गाड़ियां और रायपुर में आतंक

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में कुख्यात अपराधी वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर का आतंक अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इन दोनों भाइयों ने फर्जी तरीके से बैंकों से लोन लेकर न केवल लग्ज़री गाड़ियां खरीदीं, बल्कि समाज में अपने दबदबे और 'भौकाल' को भी इसी रास्ते कायम रखा।

इन पर आरोप है कि उन्होंने कई बैंकों से मोटी रकम का लोन लिया, गाड़ियां खरीदीं और फिर किस्तें अदा नहीं कीं। इतना ही नहीं, बैंक अधिकारियों को भी डराकर चुप करा देते थे। इसी तरह का एक सनसनीखेज मामला पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र से सामने आया है, जिसमें यूको बैंक, पेंशनवाड़ा शाखा से 1 फरवरी 2016 को 45 लाख रुपये का लोन लेकर बीएमडब्ल्यू कार खरीदी गई, लेकिन एक भी किस्त जमा नहीं की गई।

बैंक ने 31 मई 2019 को इसे एनपीए घोषित कर दिया और जबलपुर कोर्ट में वसूली हेतु केस दायर किया। कोर्ट ने 3 जनवरी 2025 को रायपुर आरटीओ को आदेश दिया कि कार जप्त कर बैंक को सौंप दी जाए ताकि उसकी नीलामी से लोन वसूला जा सके। लेकिन आदेश के बावजूद कार वीरेंद्र तोमर के पास ही रही। जब पुलिस ने कार्रवाई की पहल की, तब बैंक ने स्पष्ट चिट्ठी लिखकर कहा कि कार को बैंक को सुपुर्द किया जाए।

लग्ज़री गाड़ियों की हो रही जांच

तोमर बंधुओं के पास कई महंगी गाड़ियां हैं, जिनकी जांच अब तेज कर दी गई है। पुलिस और बैंक इस बात की तह में जा रहे हैं कि किन गाड़ियों को खरीदने में बैंक लोन लिया गया और क्या वह लोन चुकाया गया या नहीं। इन अपराधियों ने बैंकों से फर्जी लोन लेकर न केवल महंगी गाड़ियों में घूम-घूमकर धौंस जमाई, बल्कि समाज में अपने 'गुंडा इमेज' को भी चमकाया।

ज्वेलर्स और सट्टेबाजों को बनाते थे निशाना

रायपुर के सदर बाजार इलाके में कई छोटे-छोटे ज्वेलर्स को इन्होंने अपने जाल में फंसाया। ब्लैकमेलिंग, वसूली और दबाव डालना इनका आम तरीका था। ब्याज पर पैसा देना भी इनका बड़ा धंधा था, लेकिन वे पैसे उन्हीं को देते थे जो क्रिकेट सट्टा या जुआ खेलते थे – यानी वे लोग जो हारने के बाद तुरंत कैश के लिए मजबूर होते हैं।

अगर समय पर पैसा नहीं लौटाया गया, तो तोमर बंधु मोबाइल छीनने, गाड़ी उठाने और जान से मारने की धमकी देने में भी पीछे नहीं रहते थे।

क्या इस बार टूटेगा आतंक का चक्र?

लंबे समय से रायपुर की जनता इन अपराधियों के आतंक से त्रस्त रही है। ये दोनों भाई कई बार जेल गए लेकिन हर बार कुछ महीनों में ही बाहर आ गए और फिर वही अपराधों का सिलसिला शुरू हो गया। अब सवाल यह है कि क्या इस बार पुलिस इन पर कड़ा शिकंजा कस पाएगी? क्या ये हमेशा के लिए सलाखों के पीछे रहेंगे या फिर एक बार फिर छूटकर रायपुर की सड़कों पर आतंक फैलाएंगे?

पुलिस कार्रवाई से जगी उम्मीद

हाल ही में रायपुर पुलिस की सख्त और ताबड़तोड़ कार्रवाई ने आम लोगों में उम्मीद की किरण जगाई है। लोग आशावादी हैं कि इस बार वीरेंद्र और रोहित तोमर जैसे अपराधियों के खिलाफ ठोस कानूनी कदम उठाए जाएंगे और न्याय की जीत होगी।

रायपुर के लोगों को अब बस यही उम्मीद है — कानून का राज कायम हो और 'तोमर आतंक' का हमेशा के लिए अंत हो।

What's Your Reaction?

Like Like 4
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0