अंबेडकर अस्पताल में मरीजों के साथ आए परिजन बेहाल, पार्किंग में कट रही रातें न रुकने की व्यवस्था, न शौचालय—परिजन परेशान

The relatives who came with the patients to Ambedkar Hospital are in distress, spending nights in the parking lot No arrangement for staying, no toilet - relatives are upset अंबेडकर अस्पताल में मरीजों के साथ आए परिजन बेहाल, पार्किंग में कट रही रातें न रुकने की व्यवस्था, न शौचालय—परिजन परेशान
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अंबेडकर अस्पताल में मरीजों के साथ आए परिजन बेहाल, पार्किंग में कट रही रातें न रुकने की व्यवस्था, न शौचालय—परिजन परेशान

अंबेडकर अस्पताल में मरीजों के साथ आए परिजन बेहाल, पार्किंग में कट रही रातें

न रुकने की व्यवस्था, न शौचालय—परिजन परेशान

रायपुर छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों के साथ आए परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिजनों के रुकने या ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे उन्हें अस्पताल परिसर की पार्किंग, गलियारों या खुले मैदानों में दिन-रात गुजारने पड़ रहे हैं।

गर्मी, मच्छर और असुरक्षा में बीत रही रातें

तेज़ गर्मी के इस मौसम में खुले में बैठना और सोना परिजनों के लिए किसी यातना से कम नहीं है। छांव तक की उचित व्यवस्था नहीं है। महिलाएं और बुजुर्ग खास तौर पर बेहद परेशान हैं। रात में मच्छरों और सुरक्षा की चिंता के बीच उन्हें जागते हुए समय काटना पड़ता है।

ग्रामीण इलाकों से आए लोग सबसे ज्यादा प्रभावित

राज्य के सुदूर जिलों जैसे सरगुजा, कांकेर, बस्तर और जशपुर से आने वाले मरीजों के साथ उनके परिजन हफ्तों अस्पताल में रुकते हैं, लेकिन न उनके ठहरने का इंतजाम है, न भोजन-पानी का कोई सुचारू प्रबंध।

स्थानीय लोगों की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को परिजनों के लिए “विश्राम गृह” या “धर्मशाला” जैसी सुविधा शुरू करनी चाहिए, जहां न्यूनतम शुल्क पर उन्हें रुकने की जगह, साफ-सफाई, शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।

प्रशासनिक उदासीनता जारी

इस गंभीर स्थिति को लेकर अभी तक न अस्पताल प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है, न स्वास्थ्य विभाग ने। पहले भी इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

यह सिर्फ सुविधा की नहीं, मानवीय गरिमा की भी बात है।

सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त हो सकता है, लेकिन जब तक मरीज के साथ आए परिजनों को भी सम्मानजनक व्यवस्था नहीं मिलेगी, तब तक स्वास्थ्य सेवा अधूरी ही मानी जाएगी।

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