कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा – “आखिर आत्महत्याएं सिर्फ कोटा में ही क्यों हो रही हैं?”

Supreme Court strict on student suicides in Kota, asked – “Why are suicides happening only in Kota?” कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा – “आखिर आत्महत्याएं सिर्फ कोटा में ही क्यों हो रही हैं?”
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कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा – “आखिर आत्महत्याएं सिर्फ कोटा में ही क्यों हो रही हैं?”

कोटा में छात्रों की आत्महत्याओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा – “आखिर आत्महत्याएं सिर्फ कोटा में ही क्यों हो रही हैं?”अब तक 14 छात्र कर चुके हैं जान, कोर्ट ने कहा – यह बहुत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है

राजस्थान कोटा देश के प्रमुख कोचिंग हब कोटा में लगातार हो रही छात्र आत्महत्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मामले को “बेहद गंभीर” बताते हुए सरकार से पूछा – “क्या आत्महत्या की घटनाएं सिर्फ कोटा में ही क्यों हो रही हैं?”

अब तक 2025 में 14 छात्र कर चुके हैं आत्महत्या

साल 2025 की शुरुआत से अब तक कोटा में 14 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। यह आंकड़ा शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में खतरनाक संकेत देता है। कोटा, जहां देशभर से लाखों छात्र आईआईटी, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं, अब तनाव और दबाव का प्रतीक बनता जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

कोर्ट ने राजस्थान सरकार से दो टूक शब्दों में पूछा:

> “ऐसी घटनाएं केवल कोटा में ही क्यों हो रही हैं? राज्य सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?”

कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि हर आत्महत्या के बाद सिर्फ खानापूर्ति की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी सुधार नहीं दिखता।

क्या कहा राज्य सरकार ने?

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि:

सरकार मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग,

24x7 हेल्पलाइन,

शिक्षकों की ट्रेनिंग,

और साप्ताहिक छुट्टियों जैसी पहल कर रही है।

लेकिन कोर्ट ने इन उपायों को "प्रारंभिक और अस्थायी" बताते हुए कहा कि जड़ से समस्या को पहचानने और उसका समाधान करने की ज़रूरत है।

कोचिंग इंडस्ट्री पर भी उठे सवाल

कोटा की कोचिंग इंडस्ट्री, जो हर साल करोड़ों रुपये का व्यापार करती है, उस पर भी कोर्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, अभिभावकों की उम्मीदें और शिक्षण पद्धति के दबाव के चलते छात्र मानसिक रूप से टूट रहे हैं।

अगली सुनवाई और संभावित निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें अब तक उठाए गए कदमों, आंकड़ों और भविष्य की रणनीति का स्पष्ट विवरण होना चाहिए। अगली सुनवाई की तारीख जल्द घोषित की जाएगी।

कोटा की घटनाएं न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी हैं कि शिक्षा व्यवस्था को केवल अंकों की दौड़ नहीं, बल्कि छात्रों के समग्र मानसिक और भावनात्मक विकास पर केंद्रित होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का दखल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ बन सकता है।

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