रायपुर: आदर्श नगर मोवा के स्कूल में तिलक, बिंदी, चूड़ी और कलावा पर रोक, अभिभावकों व नागरिकों का विरोध प्रदर्शन
रायपुर: आदर्श नगर मोवा के स्कूल में तिलक, बिंदी, चूड़ी और कलावा पर रोक, अभिभावकों व नागरिकों का विरोध प्रदर्शन
रायपुर। राजधानी रायपुर के आदर्श नगर, मोवा स्थित एक निजी स्कूल में छात्रों को तिलक, बिंदी, चूड़ी और कलावा पहनने पर प्रतिबंध लगाए जाने के खिलाफ शनिवार को वार्ड के नागरिकों और अभिभावकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अभिभावकों का कहना है कि यह आदेश न केवल धार्मिक आस्थाओं से छेड़छाड़ है, बल्कि बच्चों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाने जैसा है।
प्रदर्शन का नेतृत्व समाजसेवी जय प्रकाश चंद्रवंशी ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पालकगण और स्थानीय नागरिक स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हुए। सभी ने स्कूल के प्रिंसिपल और डायरेक्टर से मिलकर इस निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की।
थाने में शिकायत दर्ज
विरोध प्रदर्शन के बाद अभिभावकों ने संबंधित थाने में जाकर स्कूल प्रशासन के खिलाफ लिखित शिकायत भी दर्ज करवाई। उनका कहना है कि यदि इस प्रकार के मनमाने नियम थोपे जाते रहे, तो बच्चों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर सीधा आघात होगा।
पूर्व में भी उठा विवाद
यह पहली बार नहीं है जब आदर्श नगर स्थित इस स्कूल पर विवाद खड़ा हुआ हो। अभिभावकों का आरोप है कि पूर्व में बकरीद के अवसर पर स्कूल प्रबंधन ने सभी छात्रों को हरे रंग का परिधान पहनने का निर्देश दिया था और राष्ट्रगान न गाने की बात भी कही थी। उस समय भी पालकगण ने इस फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन किया था।
अभिभावकों का कहना है कि लगातार ऐसे विवादास्पद निर्णय यह दर्शाते हैं कि स्कूल प्रबंधन शिक्षा पर ध्यान देने की बजाय धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
वार्ड के नागरिकों ने कहा कि बच्चों पर इस प्रकार की रोक-टोक से उनकी मानसिकता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में जहां हर धर्म और परंपरा का सम्मान किया जाता है, वहां किसी भी संस्था को इस तरह के भेदभावपूर्ण आदेश देने का अधिकार नहीं है।
जय प्रकाश चंद्रवंशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा –
> “स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है, लेकिन यहां बार-बार धार्मिक भेदभाव फैलाने वाले कदम उठाए जा रहे हैं। पहले राष्ट्रगान का अपमान और अब तिलक, बिंदी, चूड़ी व कलावा पर प्रतिबंध… यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने प्रशासन से मांग की है कि इस स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आगे से कोई भी संस्था इस प्रकार की मनमानी न कर सके।”
अभिभावकों की मांग
प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि इस मामले की गंभीर जांच कराई जाए और स्कूल प्रबंधन को चेतावनी दी जाए। उनका कहना है कि बच्चों को शिक्षा देने का काम स्कूल का है, न कि उनकी परंपराओं और आस्थाओं को नियंत्रित करने का।
नियंत्रण की आवश्यकता
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि अगर ऐसे स्कूलों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में सामाजिक तनाव और बढ़ सकता है।
मायने
रायपुर का यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि आखिर बच्चों की सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर शिक्षा संस्थाओं की भूमिका क्या होनी चाहिए। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अपने धर्म, संस्कृति और परंपरा से जोड़कर रखना उनकी जड़ों को मजबूत बनाता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का प्रतिबंध शिक्षा और संस्कार दोनों के विपरीत है।
अभी देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या स्कूल प्रबंधन अपने निर्णय को वापस लेता है या नहीं। लेकिन फिलहाल यह विवाद रायपुर शहर में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
What's Your Reaction?
Like
1
Dislike
1
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0