बारिश बनी मुसीबत: इंद्रावती नदी में बह गया आदिवासियों का तेंदूपत्ता, करोड़ों का नुकसान

Rain becomes a trouble: Tendu leaf of tribals washed away in Indravati river, loss of crores बारिश बनी मुसीबत: इंद्रावती नदी में बह गया आदिवासियों का तेंदूपत्ता, करोड़ों का नुकसान
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बारिश बनी मुसीबत: इंद्रावती नदी में बह गया आदिवासियों का तेंदूपत्ता, करोड़ों का नुकसान

बारिश बनी मुसीबत: इंद्रावती नदी में बह गया आदिवासियों का तेंदूपत्ता, करोड़ों का नुकसान

भोपालपटनम, छत्तीसगढ़ | 25 मई 2025 छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भोपालपटनम क्षेत्र में बीते दो दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने सैकड़ों आदिवासी परिवारों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तेंदूपत्ता संग्रहण से अपनी आजीविका चलाने वाले आदिवासियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, जब उनकी मेहनत से इकट्ठा किया गया तेंदूपत्ता इंद्रावती नदी में बह गया।

अचानक बारिश, बह गया तेंदूपत्ता

भोपालपटनम क्षेत्र के दर्जनों गांवों — जिनमें कोर्सा, पेद्दागेलूर, तिमापुर और आलनार प्रमुख हैं — के ग्रामीणों ने तेंदूपत्तों को इंद्रावती नदी के किनारे सुखाने के लिए रखा था। लेकिन मौसम ने करवट ली और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा दिया। देखते ही देखते नदी किनारे रखा सारा तेंदूपत्ता बह गया।

करोड़ों की क्षति, साल भर की मेहनत बर्बाद

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता ही उनकी साल भर की सबसे बड़ी आय का स्रोत है। एक गड्डी तेंदूपत्ता तैयार करने में कई दिनों की मेहनत लगती है, और जब वह बह जाता है, तो उसका सीधा असर परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस राहत या सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

प्रशासन से मुआवजे की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शासन से मांग की है कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को तुरंत मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए मौसम चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करने की अपील की गई है।

आदिवासी बोले: "सरकार हमारी सुध ले"

ग्रामीणों का कहना है कि तेंदूपत्ता एक मौसमी आय है, और यदि यह भी नष्ट हो जाए तो उनके पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं बचता। "हमने कई हफ्ते जंगलों में घूमकर पत्ता इकट्ठा किया था। अब सब बह गया। सरकार हमारी सुध ले," एक ग्रामीण ने कहा।

भोपालपटनम में हो रही इस प्राकृतिक आपदा ने यह साफ कर दिया है कि आदिवासी समुदाय अब भी कई स्तर पर असुरक्षित है — चाहे वह मौसम की मार हो या प्रशासनिक उदासीनता। अब यह देखना बाकी है कि सरकार किस प्रकार और कितनी जल्दी इन परिवारों की सहायता के लिए आगे आती है।

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