मणिपुर में जल्द हट सकता है राष्ट्रपति शासन: एनडीए ने 44 विधायकों के समर्थन का दावा किया, राज्यपाल से की मुलाकात
मणिपुर में जल्द हट सकता है राष्ट्रपति शासन: एनडीए ने 44 विधायकों के समर्थन का दावा किया, राज्यपाल से की मुलाकात
इम्फाल/नई दिल्ली।मणिपुर में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक अस्थिरता और राष्ट्रपति शासन के बाद राज्य में जल्द ही एक नई सरकार बनने के आसार नजर आ रहे हैं। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की और 44 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया है।
सूत्रों के अनुसार, यदि प्रक्रिया सुचारू रही तो 15 जून तक राष्ट्रपति शासन हटाया जा सकता है और राज्य को एक निर्वाचित सरकार मिल सकती है।
राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि
मणिपुर में जातीय संघर्ष, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और राजनीतिक टकराव के चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार ने हालात को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन जन प्रतिनिधियों द्वारा सरकार न बना पाने के कारण राज्यपाल शासन लागू रहा।
एनडीए का बहुमत दावा
एनडीए गठबंधन में शामिल भाजपा, एनपीपी और कुछ निर्दलीय विधायकों ने अब मिलकर सरकार बनाने का दावा किया है। इनका कहना है कि वे बहुमत के लिए आवश्यक 31 विधायकों से काफी अधिक — 44 विधायकों का समर्थन जुटा चुके हैं।
इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा और सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता शामिल थे, जिन्होंने राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपा और जल्द सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
नई सरकार के संभावित चेहरे
हालांकि अभी आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद के लिए नाम की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन चर्चाओं में यह सामने आ रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह या कोई नया चेहरा भी सामने आ सकता है जो जातीय संतुलन और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चुना जाएगा।
राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद
मणिपुर में एक चुनी हुई सरकार के गठन से राज्य में जारी प्रशासनिक ठहराव और विकास कार्यों में आ रही रुकावटों को दूर करने की उम्मीद की जा रही है। नई सरकार के गठन के साथ ही यह देखना अहम होगा कि वह जमीनी स्तर पर शांति बहाल करने और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने में कितनी सफल होती है।
मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि लंबी नहीं खींचनी चाहिए। यदि एनडीए बहुमत सिद्ध करता है, तो राज्यपाल की ओर से सरकार गठन को हरी झंडी मिल सकती है। राजनीतिक स्थिरता के साथ ही राज्य में शांति स्थापना और विकास को नई दिशा मिल सकती है।
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