Chhattisgarh heated up due to "chamcha" "चमचा" बयान से गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत: कांग्रेस में बगावत, भाजपा पर भी उठे सवाल

"चमचा" बयान से गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत: कांग्रेस में बगावत, भाजपा पर भी उठे सवाल
 0

Chhattisgarh heated up due to "chamcha" छत्तीसगढ़ की राजनीति में "चमचा" बयान से मचा बवाल, कांग्रेस में नाराजगी और भाजपा पर भी सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों एक बयान को लेकर बेहद गर्मा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत ने अपने ही पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "चमचा" कह डाला। इस बयान ने कांग्रेस की सियासत में हलचल मचा दी है। वहीं, भाजपा खेमे में भी इस टिप्पणी को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

चरणदास महंत का विवादित बयान

डॉ. महंत ने हाल ही में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि “कांग्रेस के बड़े नेता अपने-अपने चमचों को संभालते हैं। कोई कभी मुख्यमंत्री बनाने की बात करता है तो कोई प्रदेश अध्यक्ष बनाने की। लेकिन यही चमचे आगे चलकर पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाएंगे।”

महंत के इस बयान के सामने आते ही कांग्रेस के भीतर नाराजगी का दौर शुरू हो गया है। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसे शब्द पार्टी की छवि को कमजोर करते हैं और कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराते हैं।

कांग्रेस में नाराजगी, भाजपा खेमे में चुप्पी

कांग्रेस खेमे में जहां इस बयान को लेकर खीझ और आक्रोश दिखाई दे रहा है, वहीं भाजपा की तरफ से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और नेताओं की बयानबाजी भाजपा के लिए अप्रत्यक्ष रूप से फायदे का सौदा हो सकती है।

भाजपा में भी पिछले दो वर्षों में कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर असंतोष के स्वर उठते रहे हैं। कार्यकर्ता कई बार अपनी नाराजगी प्रकट कर चुके हैं कि सरकार बनने के बाद उनसे संवाद कम हो गया है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कार्यकर्ताओं को "चमचा" कहना दोनों दलों के लिए एक गंभीर संदेश है।

कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि डॉ. महंत शायद यह भूल गए कि कार्यकर्ताओं के दम पर ही पार्टी सत्ता में आती है और सत्ता से बाहर भी होती है। कार्यकर्ता ही चुनावी जमीनी लड़ाई लड़ते हैं और जनता तक पार्टी का संदेश पहुंचाते हैं। अगर इन्हीं को "चमचा" कहकर नीचा दिखाया जाएगा, तो यह पार्टी के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं होगा।

कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज है कि यदि नेताओं का रवैया ऐसा ही रहा तो एक बार फिर पार्टी को लंबे समय तक विपक्ष में बैठना पड़ सकता है। लोग याद दिला रहे हैं कि पिछली बार कांग्रेस को 15 साल का वनवास इसी वजह से झेलना पड़ा था कि नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच की खाई गहरी हो गई थी।

भाजपा में भी असंतोष की स्थिति

दूसरी ओर, भाजपा की सरकार बने लगभग दो साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी पूछ-परख पहले जैसी नहीं रही। जमीनी स्तर पर कई कार्यकर्ता बड़े नेताओं से मिलने और अपनी बात रखने में असहज महसूस कर रहे हैं। यह स्थिति भाजपा के लिए भी चिंता का कारण है।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि अगर दोनों ही प्रमुख दल अपने जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते रहेंगे और उन्हें अपमानजनक शब्दों से संबोधित करेंगे, तो यह उनके संगठनात्मक ढांचे को कमजोर करेगा। कार्यकर्ताओं की नाराजगी सीधे-सीधे चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है।

सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ बयान

डॉ. चरण दास महंत का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कांग्रेस के समर्थक और विरोधी दोनों ही इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे “कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का आईना” बता रहे हैं तो कुछ कार्यकर्ता खुलकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं।

मायने

छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी का यह नया दौर एक बार फिर साबित करता है कि नेताओं के शब्द किस तरह माहौल को बिगाड़ सकते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. चरण दास महंत का "चमचा" बयान पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। वहीं भाजपा को भी यह समझना होगा कि केवल सत्ता में बने रहने से संगठन मजबूत नहीं होता, बल्कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और उनका सम्मान ही पार्टी की असली ताकत है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपने नाराज कार्यकर्ताओं को कैसे मनाती है और भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे में कार्यकर्ताओं को कैसे जोड़कर रखती है। लेकिन फिलहाल छत्तीसगढ़ की सियासत में "चमचा" बयान ने बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है।

What's Your Reaction?

Like Like 2
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0