छत्तीसगढ़ का प्रशासन ‘ऑटोपायलट’ मोड पर? अमिताभ जैन गए विदेश प्रशासन व्यवस्था लावारिस..

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छत्तीसगढ़ का प्रशासन ‘ऑटोपायलट’ मोड पर? अमिताभ जैन गए विदेश  प्रशासन व्यवस्था लावारिस..

छत्तीसगढ़ का प्रशासन ‘ऑटोपायलट’ मोड पर?

मुख्य सचिव अमिताभ जैन विदेश दौरे पर, किसी को नहीं सौंपा कार्यभार

रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों एक अनोखी स्थिति से गुजर रही है। राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन विदेश यात्रा पर हैं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में किसी भी अधिकारी को कार्यभार नहीं सौंपा है। प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिना कप्तान का जहाज़

मुख्य सचिव को राज्य प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी और सभी विभागों के समन्वयक के रूप में माना जाता है। वे नीतिगत फैसलों से लेकर आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने तक की जिम्मेदारी संभालते हैं। आमतौर पर मुख्य सचिव के अवकाश या विदेश दौरे पर जाने की स्थिति में कार्यभार किसी वरिष्ठ अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव को सौंपा जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति प्रशासनिक तौर पर बेहद असामान्य और जोखिमपूर्ण है। प्रदेश नक्सली गतिविधियों से प्रभावित है और अचानक कोई आपात स्थिति उत्पन्न होने पर निर्णय लेने का संकट खड़ा हो सकता है।

पहले भी मिल चुके हैं उदाहरण

यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य ने मुख्य सचिव के बिना कामकाज चलाने की कोशिश की हो।

वर्ष 2013 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्य सचिव पी.के. चौधरी छुट्टी पर गए थे और कार्यभार तय न होने से सचिवालय में फाइलों पर हस्ताक्षर तक अटक गए। कई विभागों के आदेश लंबित हो गए और मंत्रियों को कार्य कराने में कठिनाई हुई।

इसी तरह दिल्ली में भी एक बार मुख्य सचिव की अनुपस्थिति में विभागों का समन्वय बिगड़ गया था और फाइलें इधर-उधर भटकती रहीं।

इन उदाहरणों से यह साफ है कि प्रशासनिक व्यवस्था में मुख्य सचिव का होना कितना अहम है।

जवाबदेही पर बड़ा सवाल

सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि अगर इन 15 दिनों में कानून-व्यवस्था संबंधी संकट, प्राकृतिक आपदा या नक्सली हमला जैसी कोई आपात स्थिति आती है तो अंतिम निर्णय लेने का जिम्मेदार कौन होगा?

सैद्धांतिक रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग आपात प्रबंधन कर सकते हैं, लेकिन मुख्य सचिव की अनुपस्थिति से समन्वय की कमी और निर्णय लेने में विलंब होना तय है।

राजनीति में बढ़ी हलचल

इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। विपक्ष सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है और सवाल कर रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ इतना सुरक्षित है कि बिना मुख्य सचिव के भी प्रशासन चल सकता है? वहीं जानकारों का मानना है कि श्री जैन संविदा पर कार्यरत हैं और शायद कार्यभार सौंपने पर उनकी पकड़ ढीली पड़ने का अंदेशा था, इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया।

मायने

फिलहाल, छत्तीसगढ़ का प्रशासन ‘ऑटोपायलट मोड’ पर है। यह स्थिति कितनी सुरक्षित और व्यवहारिक है, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिल सकता है। लेकिन इतना तय है कि राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर यह खालीपन गंभीर सवाल छोड़ रहा है।

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