मोदी सरकार का षड्यंत्र उजागर: सुप्रीम कोर्ट की फटकार से ईडी की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा बोले - ‘जांच एजेंसियों को बनाया गया है भयादोहन का औजार’
मोदी सरकार का षड्यंत्र उजागर: सुप्रीम कोर्ट की फटकार से ईडी की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा बोले - ‘जांच एजेंसियों को बनाया गया है भयादोहन का औजार’
रायपुर, 22 मई 2025 छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) को लगाई गई लगातार फटकारों के बाद, मोदी सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का आरोप एक बार फिर ज़ोर पकड़ता दिख रहा है। इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने तीखा प्रहार किया है।
उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी संवैधानिक जांच एजेंसियों का दुरुपयोग मोदी सरकार के अधीन एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसमें राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाकर भाजपा अपने एजेंडे को थोपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नेता पटकथा लिखते हैं और ईडी उसका क्रियान्वयन करती है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी - “ईडी का रवैया संविधान के विरुद्ध”
5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कथित शराब घोटाले की सुनवाई के दौरान ईडी की जांच पर सख्त सवाल खड़े करते हुए कहा था कि "बिना पर्याप्त साक्ष्य केवल आरोप लगाने से अभियोजन पक्ष टिक नहीं पाएगा।" अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि ईडी ने कई मामलों में इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई है।
आज सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के कथित शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर प्रतिबंध लगाते हुए ईडी को संविधान की अवहेलना करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने यहां तक पूछ लिया कि “आप व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सकते हैं, लेकिन कंपनियों के खिलाफ नहीं? क्या आप देश के संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं कर रहे?”
भाजपा नेताओं को क्लीन चिट, विरोधियों पर कार्रवाई: दोहरा मापदंड
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा केवल उन्हीं नेताओं पर कार्रवाई करवाती है जो उसके खिलाफ खड़े होते हैं। वहीं जो नेता भाजपा के समर्थन में आ जाते हैं, उनके खिलाफ चल रही जांच अचानक ठप हो जाती है।
उन्होंने ऐसे दर्जनों उदाहरण गिनाए, जिनमें अजीत पवार, हेमंता बिस्वा सरमा, मुकुल रॉय, एकनाथ शिंदे, नारायण राणे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल जैसे नेता शामिल हैं – जिनके खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ ईडी, सीबीआई और आईटी विभाग की जांच बंद कर दी गई। वर्मा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि "मोदी वॉशिंग मशीन में उनके सारे पाप धुल गए।"
मोदी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ एक जुमला
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘करप्शन पर जीरो टॉलरेंस’ का दावा महज़ एक जुमला है। वास्तव में भाजपा खुद भ्रष्टाचारियों का गढ़ बन चुकी है, और मोदी सरकार का मतलब अब ‘भ्रष्टाचारियों की सुरक्षा की गारंटी’ से हो गया है।
वर्मा ने कहा, “भाजपा जब राजनीतिक मुकाबला नहीं कर पाती, तो जांच एजेंसियों का डर दिखाकर, फर्जी केस बनाकर विपक्ष को दबाने की कोशिश करती है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई जा रही फटकारें इस षड्यंत्र को उजागर कर रही हैं।”
सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों से यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि क्या देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं या फिर राजनीतिक एजेंडे का शिकार बन चुकी हैं। कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह जांच एजेंसियों के राजनीतिक दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी, और जनता को सच्चाई से अवगत कराती रहेगी।
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