किरू जलविद्युत परियोजना घोटाला: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक समेत छह पर CBI का शिकंजा

Kiru Hydroelectric Project Scam: CBI Screws on Six, Including Former Jammu and Kashmir Governor Satpal Malik किरू जलविद्युत परियोजना घोटाला: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक समेत छह पर CBI का शिकंजा
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किरू जलविद्युत परियोजना घोटाला: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक समेत छह पर CBI का शिकंजा

किरू जलविद्युत परियोजना घोटाला: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक समेत छह पर CBI का शिकंजा

श्रीनगर, मई 2025 — केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जम्मू-कश्मीर की बहुप्रतीक्षित 624 मेगावाट क्षमता वाली किरू जलविद्युत परियोजना से जुड़े एक बड़े घोटाले की परतें उधेड़ते हुए, पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक सहित छह लोगों को आरोपित किया है। यह कार्रवाई तीन वर्षों की गहन जांच के बाद की गई है, जिसमें ठेके की प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं के प्रमाण पाए गए।

क्या है मामला?

किरू जलविद्युत परियोजना का निर्माण चिनाब नदी पर किया जा रहा है। यह परियोजना चिनाव वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CVPPPL) के अंतर्गत आती है, जो कि NHPC, JKSPDC और PTC इंडिया का एक संयुक्त उपक्रम है। इस परियोजना के सिविल कार्यों के लिए वर्ष 2019 में 2200 करोड़ रुपये का ठेका आबंटित किया गया था।

CBI की जांच में पाया गया कि इस ठेके को देने में तय प्रक्रियाओं और नियमों का उल्लंघन किया गया। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में पक्षपात किया गया और ठेका एक खास कंपनी — पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड — को लाभ पहुंचाने की मंशा से दिया गया।

जिन पर लगे आरोप:

CBI द्वारा दाखिल आरोप पत्र में जिन प्रमुख लोगों को नामजद किया गया है, वे हैं:

सतपाल मलिक: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल (2018 - 31 अक्टूबर 2019 तक)

नवीन कुमार चौधरी: उस समय के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, जो परियोजना से जुड़े अहम प्रशासनिक पद पर थे

एमएस बाबू, एमके मित्तल, अरुण कुमार मिश्रा: चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट से संबंधित तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारी

पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड: ठेका पाने वाली निजी कंपनी

सतपाल मलिक का खुलासा और भूमिका:

गौरतलब है कि फरवरी 2022 में एक साक्षात्कार के दौरान सतपाल मलिक ने यह सनसनीखेज दावा किया था कि जब वह राज्यपाल थे, तब उन्हें किरू परियोजना की कुछ फाइलों को मंजूरी देने के लिए एक भारी रिश्वत की पेशकश की गई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी और एक प्रमुख नेता शामिल थे। यह बयान उस समय राजनीतिक गलियारों में हलचल का कारण बना था।

CBI की जांच में सतपाल मलिक के इस बयान की भी पुष्टि हुई है और इसे भी आरोप पत्र में आधार बनाया गया है। हालांकि, CBI यह भी जांच कर रही है कि क्या उन्होंने रिश्वत को ठुकराने के बावजूद प्रक्रिया में किसी प्रकार की शिथिलता बरती थी या कोई निर्णय लेने में पक्षपात किया गया था।

CBI की कार्रवाई और अदालत में स्थिति:

CBI ने लंबी पूछताछ, दस्तावेजी साक्ष्य, ई-मेल व पत्राचार और तकनीकी अनुमोदनों के विश्लेषण के बाद यह आरोप पत्र तैयार किया है। यह आरोप पत्र विशेष CBI अदालत में दाखिल कर दिया गया है और जल्द ही सभी आरोपितों को समन भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक असर:

यह मामला न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि देश की अन्य जलविद्युत परियोजनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और परियोजनाओं की स्वतंत्र ऑडिट की मांग की है। उधर, पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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