जी-राम-जी योजना से किसान जयलाल की बदली तस्वीर, आजीविका डबरी से सिंचाई के साथ मछली पालन और सेमी की खेती सरगुजा के ग्राम सपना में आजीविका डबरी बनी बहुउपयोगी परिसंपत्ति, 50-60 डिसमिल में सेमी की खेती से बढ़ेगी आय

Ji-Ram-Ji' scheme transforms farmer Jaylal's fortunes; livelihood pond enables irrigation, fish farming, and cultivation of broad beans (semi). In Sapna village, Sarguja, the livelihood pond has become a multi-purpose asset; income set to rise through broad bean cultivation on a 50-60 decimal plot.
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जी-राम-जी योजना से किसान जयलाल की बदली तस्वीर, आजीविका डबरी से सिंचाई के साथ मछली पालन और सेमी की खेती सरगुजा के ग्राम सपना में आजीविका डबरी बनी बहुउपयोगी परिसंपत्ति, 50-60 डिसमिल में सेमी की खेती से बढ़ेगी आय

जी-राम-जी योजना से किसान जयलाल की बदली तस्वीर, आजीविका डबरी से सिंचाई के साथ मछली पालन और सेमी की खेती

सरगुजा के ग्राम सपना में आजीविका डबरी बनी बहुउपयोगी परिसंपत्ति, 50-60 डिसमिल में सेमी की खेती से बढ़ेगी आय

रायपुर, 6 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और आजीविका के नए साधन विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। विकसित भारत जी-राम-जी योजना के तहत निर्मित आजीविका डबरी किसानों के लिए सिंचाई के साथ-साथ मछली पालन और खेती से अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है।

सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सपना के किसान जयलाल के लिए आजीविका डबरी ऐसी ही बहुउपयोगी परिसंपत्ति साबित हुई है। डबरी में बारिश का पानी संग्रहित होने से उन्हें खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने डबरी में मछली पालन भी शुरू किया है।

सिंचाई की समस्या हुई आसान

किसान जयलाल ने बताया कि जी-राम-जी योजना के तहत उनके लिए आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया है। बारिश के दौरान इसमें पानी जमा हो जाता है, जिसे जरूरत के अनुसार खेतों की सिंचाई में उपयोग किया जा रहा है।

पहले खेती के लिए पानी की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौती थी। बारिश के पानी को सुरक्षित रखने की सुविधा नहीं होने के कारण इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। अब डबरी के माध्यम से पानी का संरक्षण होने से जरूरत के समय खेतों में सिंचाई की जा रही है।

डबरी में मछली पालन, खेत में सेमी की खेती

जयलाल ने बताया कि आजीविका डबरी का उपयोग केवल सिंचाई के लिए ही नहीं हो रहा है। उन्होंने इसमें मछली पालन भी शुरू किया है। इसके अलावा करीब 50-60 डिसमिल जमीन में सेमी की खेती की जा रही है।

इस तरह एक ही परिसंपत्ति उनके लिए खेती, सिंचाई और मछली पालन को जोड़ने का माध्यम बन गई है। इससे कृषि गतिविधियों के साथ अतिरिक्त आय के अवसर भी तैयार हुए हैं।

जल संरक्षण के साथ बढ़ रही ग्रामीण आजीविका

आजीविका डबरी ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के संरक्षण को सीधे किसानों की आजीविका से जोड़ने का माध्यम बन रही है। डबरी में जमा पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है, वहीं इसी जल संरचना से मछली पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

ग्राम सपना के किसान जयलाल का अनुभव इसी बदलाव का उदाहरण है। डबरी बनने से जहां उन्हें खेती के लिए पानी की सुविधा मिली है, वहीं मछली पालन के जरिए अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी खुला है।

किसान ने कहा- “विष्णु भैया को बहुत-बहुत धन्यवाद”

आजीविका डबरी से मिली सुविधा पर खुशी जाहिर करते हुए किसान जयलाल ने कहा कि डबरी बनने से सिंचाई की समस्या काफी हद तक आसान हो गई है। अब वह डबरी के पानी से खेतों की सिंचाई करने के साथ मछली पालन भी कर रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “डबरी बनने से सिंचाई की सुविधा हो गई है। खेती-बाड़ी करने में अब परेशानी नहीं होती। डबरी के पानी से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं और मछली पालन भी कर रहे हैं। इसके लिए विष्णु भैया को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

जी-राम-जी योजना के तहत निर्मित यह आजीविका डबरी ग्राम सपना में जल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक उपयोगी उदाहरण बनकर सामने आई है। सिंचाई, खेती और मछली पालन को एक साथ जोड़कर यह परिसंपत्ति किसान जयलाल की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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