robbers? Medical mafia in Chhattisgarh धरती के भगवान या लुटेरे? छत्तीसगढ़ में मरीजों की मजबूरी पर फलता-फूलता मेडिकल माफिया

धरती के भगवान या लुटेरे? छत्तीसगढ़ में मरीजों की मजबूरी पर फलता-फूलता मेडिकल माफिया
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robbers? Medical mafia  in Chhattisgarh     धरती के भगवान या लुटेरे? छत्तीसगढ़ में मरीजों की मजबूरी पर फलता-फूलता मेडिकल माफिया

धरती के भगवान या लुटेरे? छत्तीसगढ़ में मरीजों की मजबूरी पर फलता-फूलता मेडिकल माफिया

रायपुर। कभी समाज में डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता था। उनकी पहचान सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल के रूप में होती थी। लेकिन समय बदलने के साथ-साथ यह छवि धूमिल होती जा रही है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं एक "बिजनेस मॉडल" में तब्दील हो चुकी हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय मरीज, जिनके लिए डॉक्टर भगवान जैसे थे, अब उन डॉक्टरों के लिए सिर्फ कमाई का साधन बन चुके हैं।

ग्रामीण मरीजों की मजबूरी बन गया "रेफरल सिस्टम"

गांव-देहात में प्रैक्टिस करने वाले कई डॉक्टर इलाज करने के बजाय मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर कर देते हैं। यह रेफरल कोई मानवीय कारण नहीं बल्कि कमीशन की लालच में किया जाता है। ग्रामीण डॉक्टर मरीज को धमकाते हैं कि उसकी हालत गंभीर है और केवल राजधानी रायपुर के बड़े हॉस्पिटल में ही इलाज संभव है। मजबूरी में मरीज और उनके परिजन डॉक्टर की बात मानकर रायपुर पहुंचते हैं।

जांच में सामने आया है कि राजधानी के कई नामी-गिरामी प्राइवेट हॉस्पिटल जैसे—रामकृष्ण हॉस्पिटल, एमएमआई हॉस्पिटल, बालाजी हॉस्पिटल, नारायणा हॉस्पिटल, सुयश हॉस्पिटल और देवी हॉस्पिटल—इस गोरखधंधे का हिस्सा हैं। यहां पर आने वाले रेफर मरीजों पर भारी-भरकम बिल बनाया जाता है। बाद में उस बिल का 15 से 20 प्रतिशत कमीशन सीधे मरीज को भेजने वाले डॉक्टर की जेब में जाता है। यानी मरीज इलाज कराने के साथ-साथ डॉक्टरों और हॉस्पिटल प्रबंधन के बीच "कमिश्नर फैक्स" बनकर रह जाता है।

इलाज के नाम पर मुनाफाखोरी

यह व्यवस्था केवल स्वास्थ्य सेवा की आड़ में चल रहा "मेडिकल माफिया" है। जिन बीमारियों का इलाज आसानी से गांव या छोटे कस्बों में हो सकता है, उन्हें जानबूझकर बड़ा रूप दिखाकर राजधानी भेज दिया जाता है। इससे मरीज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है।

कई मरीज ऐसे उदाहरण दे चुके हैं कि उन्हें अस्पताल का बिल चुकाने के लिए घर के खेत, गहने और अन्य कीमती सामान बेचना पड़ा। आर्थिक रूप से कमजोर लोग कर्ज में डूब जाते हैं।

प्राइवेट अस्पतालों का मुनाफा मॉडल

प्राइवेट अस्पताल अब स्वास्थ्य सेवा नहीं बल्कि शुद्ध व्यापार के रूप में काम कर रहे हैं। भर्ती मरीज से हर टेस्ट, दवाई और सुविधा के नाम पर हजारों रुपये वसूले जाते हैं। यहां तक कि कई बार मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद भी परिवार को बॉडी देने के लिए पैसे मांगे जाते हैं। कई घटनाओं में हॉस्पिटल प्रबंधन ने शव को बंधक बना लिया, जब तक परिजन बिल का पूरा भुगतान नहीं कर देते। यह अमानवीय स्थिति प्रदेश में कई बार सामने आ चुकी है।

सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था, जनता की मजबूरी

मेडिकल माफिया के पनपने की सबसे बड़ी वजह है सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था। यहां न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न ही मशीनें और दवाइयां। भीड़-भाड़, लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण मरीज इलाज कराने से बचते हैं। मजबूरी में वे प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं, जहां उन्हें लूट का शिकार होना पड़ता है।

यानी जनता के सामने कोई विकल्प नहीं बचता—एक तरफ सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था और दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पतालों की लूट।

सरकार पर उठ रहे सवाल

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर "सुशासन" की बात करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र में सुशासन की स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई देती है। जब डॉक्टरों और अस्पतालों ने मिलकर इलाज को व्यापार में बदल दिया है, तो आम जनता की उम्मीदें टूट रही हैं।

यह सवाल उठना लाजमी है कि सरकार इन मेडिकल माफियाओं पर कब और कैसे कार्रवाई करेगी? क्या केवल बयानबाजी से ही जनता का भरोसा बहाल हो पाएगा या फिर सख्त कानून बनाकर इस लूट को रोका जाएगा?

जनता की सबसे बड़ी जरूरत—सस्ती और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवा

स्वास्थ्य सेवा नागरिकों की बुनियादी जरूरत है। गरीब से गरीब व्यक्ति भी चाहता है कि उसे समय पर सही इलाज मिले। लेकिन छत्तीसगढ़ में हालात ऐसे बन गए हैं कि इलाज अब केवल अमीरों के लिए ही सुलभ हो रहा है।

जरूरी है कि सरकार—

सरकारी अस्पतालों की हालत सुधारे

प्राइवेट अस्पतालों की पारदर्शी मॉनिटरिंग करे

रेफरल कमीशन सिस्टम पर रोक लगाए

मरीजों से हो रही लूट पर कड़ी कार्रवाई करे

मायने

डॉक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है क्योंकि उनका पेशा सेवा और मानवता से जुड़ा है। लेकिन जब वही पेशा पैसों की हवस में डूब जाए तो समाज का सबसे बड़ा विश्वास टूट जाता है। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य क्षेत्र की यह लूट आम आदमी की जिंदगी और मौत का सवाल बन गई है। अब देखना यह होगा कि विष्णु सरकार इन मेडिकल माफियाओं पर अंकुश लगाकर जनता का भरोसा जीत पाती है या नहीं।

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