गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान, मलेशिया से आए सैलानी नेचर हीलिंग कैंप में हुए शामिल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान, मलेशिया से आए सैलानी नेचर हीलिंग कैंप में हुए शामिल
रायपुर, 10 अगस्त 2025। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास पहचान बना रहा है। स्थानीय प्रशासन और पर्यटन समितियों की पहल पर आयोजित दो दिवसीय नेचर हीलिंग कैंप में मलेशिया सहित देश के विभिन्न राज्यों से पर्यटकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बनमनई इको फाउंडेशन और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में मलेशिया से चार विदेशी मेहमान पहुंचे। इनके अलावा बिहार के फिल्म निर्माता आर्यन चंद्रप्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार विभाष झा, बंगलौर के डॉ. अरविंद गुप्ता, कोल इंडिया के सेवानिवृत्त प्रबंधक ए.के. सिंह, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय और अमलाई के शोधार्थी सहित 20 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
लक्ष्मणधारा और झोझा जलप्रपात बने आकर्षण का केंद्र
पर्यावरणविद् संजय पयासी के नेतृत्व में प्रतिभागियों ने जिले के प्रसिद्ध लक्ष्मणधारा और झोझा जलप्रपात की ट्रैकिंग की। अरपा नदी पर स्थित लक्ष्मणधारा जलप्रपात पर पानी की उड़ती बूंदों और छनकर आती सूर्य किरणों से बना इंद्रधनुष सैलानियों के लिए यादगार नज़ारा बन गया। वहीं, झोझा जलप्रपात की 350 फीट ऊँचाई से गिरती धार ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जिला प्रशासन द्वारा यहां तक पहुँचने के लिए बनाई गई सीढ़ियों ने ट्रैकिंग को और आसान बना दिया।
स्थानीय संस्कृति में ढले विदेशी मेहमान
पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन पर मलेशियाई मेहमानों का आत्मीय स्वागत किया गया। उन्हें हरी सब्जियों, बाँस की टोपी और ऑफ-रोड राइडिंग का अनुभव कराया गया। लक्ष्मणधारा पर्यटन समिति के पकौड़े और लेमन-जिंजर चाय ने मेहमानों का दिल जीत लिया।
लमना होमस्टे में ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक तिलक और लोकनृत्य गौरा-गौरी के साथ उनका स्वागत किया। लोक संगीत और नृत्य की लय ने विदेशी सैलानियों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया।
भाषा नहीं बनी प्रेम और सहयोग की राह में बाधा
दूसरे दिन मलेशियाई पर्यटक एलिस ने ग्रामीण महिलाओं के साथ मिलकर नाश्ता तैयार किया। भाषा का फर्क यहां मायने नहीं रखता था—प्रेम, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने सबको जोड़ दिया।
सांस्कृतिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि लमना गांव का सामुदायिक पर्यटन मॉडल न केवल आर्थिक रूप से ग्रामीणों को सशक्त कर रहा है, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी उन्हें समृद्ध बना रहा है। यह आयोजन इस बात का उदाहरण है कि पर्यटन कैसे सीमाओं से आगे बढ़कर संस्कृतियों को जोड़ सकता है।
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