महासमुंद जिले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: गांधी ग्राम तमोरा में 100 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया, ग्रामीणों और वन अमले में हुई झड़प

Forest department's big action in Mahasamund district: 100 hectares of forest land was removed from encroachment in Gandhi village Tamora, villagers and forest officials clashed महासमुंद जिले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: गांधी ग्राम तमोरा में 100 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया, ग्रामीणों और वन अमले में हुई झड़प
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महासमुंद जिले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: गांधी ग्राम तमोरा में 100 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया, ग्रामीणों और वन अमले में हुई झड़प

महासमुंद जिले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: गांधी ग्राम तमोरा में 100 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया, ग्रामीणों और वन अमले में हुई झड़प

महासमुंद (छत्तीसगढ़): महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक अंतर्गत गांधी ग्राम तमोरा में वन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। वन परिक्षेत्र क्रमांक 95 और 96 में 52 ग्रामीण परिवारों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए वन विभाग ने पुलिस बल की सहायता से अभियान चलाया, जो कई घंटों तक चला।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये परिवार वर्ष 2012 से उक्त वन भूमि पर खेती कर रहे थे। ग्रामीणों ने इस क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ काटकर लगभग 100 हेक्टेयर वनभूमि पर कब्जा कर लिया था और वहाँ स्थायी रूप से खेतीबाड़ी कर रहे थे। वन विभाग का कहना है कि यह भूमि संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है, और यहां किसी भी प्रकार की कृषि या निर्माण गतिविधि अवैध है।

कार्रवाई के दौरान हुआ विरोध

जब वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम गांव में पहुंची और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। इस दौरान खेतों में बनाए गए मेडों को जेसीबी की मदद से हटाया गया। विरोध के चलते कुछ स्थानों पर वन अमले और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़पें भी हुईं।

झड़प के दौरान कई महिलाओं ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन वन विभाग की महिला कर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक बसों में बैठाया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। ग्रामवासियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ जबरदस्ती की गई और उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के वहां से हटाया गया।

ग्रामीणों की आपबीती

गांव के संत कुमार खैरवार, गणेश यादव और रमेश ध्रुव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्ष 2012 से इस जमीन पर कृषि कार्य कर रहे हैं और उनकी आजीविका पूरी तरह इसी भूमि पर निर्भर है। उनका आरोप है कि उन्हें पुनर्वास की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दी गई। कुछ परिवारों को गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक के पाट संदरी गांव में स्थानांतरित किया गया है, जबकि अन्य को अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया है।

वन विभाग का पक्ष

इस पूरे मामले पर वन विभाग के प्रभारी डीएफओ वेंकटेश एम.जी. ने बताया कि ग्राम तमोरा में वन क्षेत्र क्रमांक 95 और 96 में लगभग 100 हेक्टेयर वन भूमि पर पिछले चार से पांच वर्षों में अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। “इन लोगों ने सैकड़ों पेड़ काटकर खेती शुरू की थी, जो कि स्पष्ट रूप से वन अधिनियम का उल्लंघन है। इस अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने से पहले कई बार नोटिस जारी किए गए थे और ग्रामीणों को वैकल्पिक पुनर्वास की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद अवैध कब्जा जारी रहा, जिसके कारण कार्रवाई करनी पड़ी।

स्थिति पर नजर

घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की है। वहीं, प्रभावित परिवार अब वैकल्पिक पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

इस कार्रवाई ने जिले भर में वन भूमि से अवैध कब्जे और पुनर्वास व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मुद्दे का स्थायी समाधान कैसे करता है, ताकि एक ओर वन भूमि की सुरक्षा बनी रहे और दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीणों को न्याय भी मिल सके।

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