छत्तीसगढ़ के कांकेर में तीन तलाक का पहला मामला दर्ज, पत्नी को फोन पर दिया तलाक

First case of triple talaq registered in Kanker, Chhattisgarh, wife given divorce over phone छत्तीसगढ़ के कांकेर में तीन तलाक का पहला मामला दर्ज, पत्नी को फोन पर दिया तलाक
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छत्तीसगढ़ के कांकेर में तीन तलाक का पहला मामला दर्ज, पत्नी को फोन पर दिया तलाक

छत्तीसगढ़ के कांकेर में तीन तलाक का पहला मामला दर्ज, पत्नी को फोन पर दिया तलाक

कांकेर, 5 अगस्त 2025 छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से तीन तलाक का चौंकाने वाला पहला मामला सामने आया है। पीड़ित महिला सलमा वारिस ने अपने पति इरफान वारसी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। सलमा ने आरोप लगाया कि उसने तलाक न देने की गुहार लगाई, लेकिन पति ने महज 2 मिनट 5 सेकंड में तीन बार "तलाक" कहकर रिश्ता तोड़ दिया।

सलमा के अनुसार, शादी से पहले ही उसके पति के संबंध एक अन्य महिला से थे। शादी के बाद लगातार उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। ससुराल पक्ष की तरफ से दहेज की मांगें की जाती रहीं और कई बार मारपीट भी हुई। अप्रैल माह में उसे कुछ समय के लिए मायके भेजा गया, लेकिन इसी दौरान पति ने अपनी प्रेमिका से शादी कर ली। इसके बाद 20 जून को पति ने फोन पर तलाक दे दिया।

सलमा की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

तीन तलाक कानून के बावजूद जारी हैं घटनाएं

भारत सरकार ने 2019 में तीन तलाक को अवैध घोषित कर सख्त कानून लागू किया था, जिसके तहत ऐसा करने वालों को जेल तक हो सकती है। इसके बावजूद देश के कुछ हिस्सों में अब भी इस प्रकार की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कांकेर की यह घटना छत्तीसगढ़ में तीन तलाक का पहला मामला होने के कारण खासा चर्चा में है।

मुस्लिम समाज में सुधार की आवश्यकता पर उठे सवाल

यह मामला न सिर्फ कानून के उल्लंघन की मिसाल है, बल्कि इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या मुस्लिम समाज में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सामाजिक चेतना और सुधार पर्याप्त रूप से हो रहे हैं?

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक समाज में जागरूकता नहीं बढ़ेगी और धार्मिक शिक्षाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ संतुलित नहीं किया जाएगा, तब तक महिलाओं के शोषण पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल होगा।

सरकार की सख्ती और महिला अधिकारों की दिशा में प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए तीन तलाक कानून जैसे सख्त कदम उठाए हैं। इसके चलते देशभर में तीन तलाक के मामलों में कमी जरूर आई है, लेकिन कांकेर जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अभी भी जमीनी स्तर पर इस कानून को लेकर जागरूकता और क्रियान्वयन की कमी है।

मायने

छत्तीसगढ़ के कांकेर की यह घटना मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों, सामाजिक सोच और कानून के पालन को लेकर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। अब यह देखना होगा कि पुलिस की जांच किस दिशा में जाती है और कानून पीड़िता को कितना न्याय दिला पाता है।

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