छत्तीसगढ़ में स्कूलों में स्कैनिंग की सुविधा के बावजूद, सरकारी किताबों की स्कैनिंग के लिए शिक्षकों और छात्रों को निजी सेंटरों में भेजा जा रहा

Despite the availability of scanning facilities in schools in Chhattisgarh, teachers and students are being sent to private centres for scanning government books छत्तीसगढ़ में स्कूलों में स्कैनिंग की सुविधा के बावजूद, सरकारी किताबों की स्कैनिंग के लिए शिक्षकों और छात्रों को निजी सेंटरों में भेजा जा रहा
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छत्तीसगढ़ में स्कूलों में स्कैनिंग की सुविधा के बावजूद, सरकारी किताबों की स्कैनिंग के लिए शिक्षकों और छात्रों को निजी सेंटरों में भेजा जा रहा

रायपुर, 02 जुलाई 2025। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर के सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में इन दिनों एक अजीबोगरीब व्यवस्था को लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच नाराज़गी का माहौल है। दरअसल, प्रदेश सरकार द्वारा वितरित की जा रही पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग का कार्य विद्यालय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से किया जा सकता है। स्कूलों में स्कैनर, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन पहले से ही मौजूद हैं, बावजूद इसके विभाग द्वारा शिक्षकों और बच्चों को निजी या निर्धारित सेंटरों में भेजकर वहीं स्कैनिंग कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

स्कैनिंग के नाम पर स्कूलों का समय हो रहा बर्बाद

शिक्षकों का कहना है कि यह कार्य स्कूल परिसर में भी सुचारू रूप से किया जा सकता है, जिससे न केवल बच्चों का पढ़ाई का समय बचेगा, बल्कि अनावश्यक दौड़-भाग और संसाधनों का खर्च भी नहीं होगा। कई स्कूल प्राचार्यों और शिक्षकों ने विभागीय अधिकारियों को मौखिक रूप से इस व्यवस्था में बदलाव का सुझाव भी दिया है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग की सुविधा पहले से उपलब्ध

शिक्षकों का तर्क है कि स्कूलों में पहले से ही ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डाटा अपलोडिंग की सुविधा मौजूद है। परीक्षा, उपस्थिति, वर्धमान सर्वेक्षण और अन्य विभागीय कार्य ऑनलाइन ही स्कूल से संपन्न हो रहे हैं। ऐसे में पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग भी वहीं से कर उसकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जा सकती है। इसके लिए स्कूलों को अनावश्यक रूप से बाहर भेजना न तो तर्कसंगत है और न ही सुविधाजनक।

अभिभावकों में भी नाराज़गी

अभिभावक संघों ने भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बच्चों को स्कैनिंग के लिए बाहर भेजने से सुरक्षा की समस्या बढ़ती है और इससे उनका अध्ययन प्रभावित होता है। कई बार छोटे बच्चों को अभिभावकों को साथ ले जाना पड़ता है, जिससे अभिभावकों का समय और अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है।

शिक्षक संगठनों ने उठाई मांग

प्रदेश शिक्षक संघ और अन्य संगठनों ने शिक्षा विभाग से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जब स्कूलों में तकनीकी संसाधन मौजूद हैं और मॉनिटरिंग ऑनलाइन हो सकती है, तो किताबों की स्कैनिंग का कार्य भी विद्यालय स्तर पर ही कराया जाना चाहिए। इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता भी प्रभावित नहीं होगी।

शिक्षा विभाग की सफाई

इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कैनिंग कार्य की गुणवत्ता और रिपोर्टिंग के मानकों को ध्यान में रखते हुए ही कुछ विशेष सेंटरों पर स्कैनिंग कराई जा रही है। हालांकि, विभाग भविष्य में इस व्यवस्था की समीक्षा कर विद्यालय स्तर पर ही स्कैनिंग की अनुमति देने पर विचार कर सकता है।

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