DRG का बड़ा ऑपरेशन: 400 से अधिक नक्सली ढेर, बसवा राजू जैसे टॉप कमांडर का खात्मा

DRG's big operation: More than 400 Naxals killed, top commander like Baswa Raju eliminated DRG का बड़ा ऑपरेशन: 400 से अधिक नक्सली ढेर, बसवा राजू जैसे टॉप कमांडर का खात्मा
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DRG का बड़ा ऑपरेशन: 400 से अधिक नक्सली ढेर, बसवा राजू जैसे टॉप कमांडर का खात्मा

DRG का बड़ा ऑपरेशन: 400 से अधिक नक्सली ढेर, बसवा राजू जैसे टॉप कमांडर का खात्मा

दंतेवाड़ा/सुकमा (छत्तीसगढ़) — छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही सुरक्षा बलों की मुहिम ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य की विशेष फोर्स District Reserve Guard (DRG) ने बीते महीनों में किए गए अभियान में करीब 400 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया है, जिनमें कई शीर्ष कमांडर, जैसे कि बसवा राजू भी शामिल हैं।

बसवा राजू, जो नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और कई सालों से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था, गोरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare) में पारंगत था और उसे जंगल के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी। उसकी रणनीतिक क्षमताओं और नेटवर्क की वजह से वह लंबे समय तक सुरक्षा बलों की पकड़ से बाहर रहा, लेकिन DRG की रणनीति और लगातार दबाव ने अंततः उसे घेर लिया।

DRG की भूमिका और रणनीति

DRG की सबसे बड़ी ताकत यह रही है कि इसमें स्थानीय युवाओं को शामिल किया गया, जिन्हें न सिर्फ क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी है, बल्कि नक्सल मूवमेंट की भी समझ है। यही वजह है कि DRG को नक्सल इलाकों में गहराई तक जाकर इंटेलिजेंस एकत्र करने और टारगेटेड ऑपरेशन को अंजाम देने में सफलता मिली है।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक 40% से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि कई अन्य आत्मसमर्पण की तैयारी में हैं। यह बदलाव सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता और सरकार द्वारा पुनर्वास नीति के प्रभाव को दर्शाता है।

नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़

नक्सली गतिविधियों में लगातार गिरावट आ रही है, और बड़े नेताओं की मौत या आत्मसमर्पण से उनका नेटवर्क कमजोर हुआ है। DRG के ऑपरेशनों ने नक्सलियों के मन में डर और भ्रम पैदा कर दिया है। बसवा राजू जैसे प्रभावशाली नेता की मौत नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका है।

सरकार का रुख और भविष्य की रणनीति

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में नक्सलवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। सुरक्षा बलों के साथ-साथ सरकार अब विकास कार्यों पर भी जोर दे रही है ताकि जंगल में रहने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

मायने 

छत्तीसगढ़ में चल रहा यह अभियान नक्सलवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई बन चुका है। DRG जैसे स्थानीय और प्रशिक्षित बलों की भूमिका आने वाले समय में और भी अहम मानी जा रही है। नक्सल नेटवर्क में दरारें स्पष्ट हैं और सरकार अब उन्हें पूरी तरह खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है।

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