Contractors are angry बकाया बिलों का भुगतान नहीं होने से कांट्रेक्टर्स का आक्रोश
बकाया बिलों का भुगतान नहीं होने से कांट्रेक्टर्स का आक्रोश
कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार पर साधा निशाना, डिप्टी सीएम को लेकर नाराज़गी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी निर्माण विभागों में ठेकेदारों के बकाया बिलों का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। निर्माण कार्य पूरे होने के बावजूद भुगतान न होने से हजारों ठेकेदारों में गहरा आक्रोश पनप रहा है। इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने हाल ही में राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित कर सरकार और अफसरशाही पर कड़ा प्रहार किया।
एसोसिएशन ने साफ कहा कि यदि समय पर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और बकाया भुगतान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। एसोसिएशन ने सभी मांगों और आपत्तियों का एक ज्ञापन तैयार कर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत निर्माण विभागों के जिम्मेदार मंत्रियों को सौंपने का निर्णय लिया है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों पर आरोप
कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने कहा कि सबसे अधिक समस्याएं उपमुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों से जुड़ी हुई हैं। उनके पास लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय (पीएचई) और नगरीय प्रशासन जैसे बड़े और महत्वपूर्ण विभाग हैं।
बीरेश शुक्ला का कहना है कि इन विभागों में अफसरशाही और मनमानी चरम पर है। कई महीनों से ठेकेदारों का भुगतान रोककर रखा गया है। इससे न केवल ठेकेदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, बल्कि निर्माण कार्य और विकास योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
जल जीवन मिशन पर संकट
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के कार्यों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। इस योजना के तहत हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ जल पहुंचाने का लक्ष्य है। लेकिन, ठेकेदारों का कहना है कि काम पूरा करने के बावजूद भुगतान नहीं हो रहा, जिससे योजना की रफ्तार थमने लगी है।
बीरेश शुक्ला ने बताया कि इस मिशन में सैकड़ों ठेकेदारों ने कार्य किया है, लेकिन बकाया भुगतान न मिलने से वे परेशान और हताश हैं। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो इस महत्वाकांक्षी योजना का “दम घुट जाएगा” और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
नल-जल योजना का राज्यांश वापस लेने पर विवाद
कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने नल-जल योजना का राज्यांश वापस लेने के फैसले को ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक ठेकेदारों को उनका भुगतान नहीं मिल जाता, तब तक इस तरह के आदेश जारी करना पूरी तरह गलत और असंवेदनशील है।
ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह फैसला तुरंत वापस नहीं लिया गया और बिलों का भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की शुरुआत प्रदेशव्यापी स्तर पर की जाएगी।
डिप्टी सीएम से मुलाकात नहीं, बढ़ा गुस्सा
एसोसिएशन ने डिप्टी सीएम अरुण साव से मुलाकात के लिए औपचारिक पत्र लिखा था। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें समय नहीं दिया गया। इस रवैये ने ठेकेदारों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
बीरेश शुक्ला ने कहा कि राजधानी रायपुर से लेकर पूरे प्रदेश में कांट्रेक्टर्स में भारी नाराज़गी है। शासन में बैठे मंत्री समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं। यदि यही हालात रहे तो ठेकेदार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
आंदोलन की तैयारी
कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी है कि अब ठेकेदार चुप बैठने वाले नहीं हैं। यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए और भुगतान नहीं किया तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों की आजीविका इसी कार्य पर निर्भर है और बार-बार भुगतान रोककर उन्हें आर्थिक संकट में धकेला जा रहा है।
मायने
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन की यह नाराज़गी केवल बकाया भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों में बढ़ती अफसरशाही और मनमानी को लेकर भी है। अब ठेकेदारों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह मुद्दा सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक गूंजेगा।
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