छत्तीसगढ़: बिलासपुर के कोटा वन क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का कहर, डिप्टी रेंजर पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला

Chhattisgarh: Timber smugglers wreak havoc in Kota forest area of ​​Bilaspur, deputy ranger attacked with ax छत्तीसगढ़: बिलासपुर के कोटा वन क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का कहर, डिप्टी रेंजर पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला
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छत्तीसगढ़: बिलासपुर के कोटा वन क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का कहर, डिप्टी रेंजर पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला

छत्तीसगढ़: बिलासपुर के कोटा वन क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का कहर, डिप्टी रेंजर पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ | 3 जून 2025 बिलासपुर जिले के कोटा वन परिक्षेत्र के सेमरिया इलाके में मंगलवार को लकड़ी तस्करों ने बन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। तस्करों द्वारा किए गए इस हमले में डिप्टी रेंजर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।

सागौन तस्करी की सूचना पर पहुंची थी टीम

मिली जानकारी के अनुसार, सेमरिया क्षेत्र में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना की पुष्टि के लिए बन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जिसमें डिप्टी रेंजर समेत कई कर्मचारी शामिल थे। जैसे ही टीम ने तस्करों को पकड़ने की कोशिश की, तस्करों ने कुल्हाड़ियों से हमला कर दिया।

डिप्टी रेंजर पर हुआ सीधा हमला

हमले के दौरान तस्करों ने टीम के सदस्यों को दौड़ा लिया। इसी दौरान एक तस्कर की कुल्हाड़ी डिप्टी रेंजर को लग गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत अब स्थिर है लेकिन उन्हें गहरे जख्म आए हैं।

तस्करों में नहीं बचा कानून का डर

इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि तस्करों को अब पुलिस और प्रशासन का कोई खौफ नहीं रह गया है। खुलेआम जंगलों की अवैध कटाई और बन अधिकारियों पर हमले यह दर्शाते हैं कि तस्करी माफिया कितने बेखौफ हो चुके हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वन विभाग को ऐसे अभियानों में पुलिस की मदद लेनी चाहिए ताकि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

घटना के बाद अब तक किसी भी तस्कर की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या बन विभाग के कर्मचारी जंगलों में अपनी जान जोखिम में डालकर बिना पर्याप्त सुरक्षा के तस्करों से लड़ते रहेंगे?

जांच और कार्रवाई की मांग

इस हमले के बाद बन कर्मियों में रोष है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जल्द ही उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर इस प्रकार की घटनाओं पर सख्त कदम उठाने की मांग की जाएगी। साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि तस्करों की पहचान कर जल्द गिरफ्तार किया जाए।

यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

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