हर्बल-आयुर्वेद उद्योग का नया गढ़ बनेगा छत्तीसगढ़, दुर्ग में तैयार अत्याधुनिक केंद्रीय इकाई
छत्तीसगढ़ बनेगा हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों का प्रमुख केंद्र, दुर्ग में स्थापित हुआ आधुनिक केंद्रीय प्रसंस्करण परिसर
छत्तीसगढ़ अब हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों के क्षेत्र में देश का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मध्य भारत की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई दुर्ग जिले के जामगांव (एम) में स्थापित की गई है। इस इकाई में राज्य के वनों में उपलब्ध बहुमूल्य लघु वनोपजों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण कर उनसे गुणवत्तायुक्त औषधीय उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
इस केंद्रीय इकाई में प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये के आयुर्वेदिक औषधीय उत्पादों का निर्माण और प्रसंस्करण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा किया गया है।
‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र और राज्य सरकार के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देते हुए छत्तीसगढ़ में स्थानीय उद्यमियों को गुणवत्तायुक्त हर्बल व आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नई उद्योग नीति में वनोपज आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को ‘थ्रस्ट सेक्टर’ में शामिल किया गया है और विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान भी रखा गया है।
फॉरेस्ट टू फार्मेसी मॉडल की शुरुआत
जामगांव (एम) में स्थापित इस अत्याधुनिक केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई से फॉरेस्ट टू फार्मेसी मॉडल की शुरुआत हुई है। 27.87 एकड़ में फैले इस परिसर में फार्मास्युटिकल ग्रेड उपकरणों के ज़रिए आधुनिक तकनीक से चूर्ण, सिरप, तेल, अवलेह और टैबलेट के रूप में आयुर्वेदिक औषधियों का उत्पादन, प्रसंस्करण और पैकेजिंग किया जाएगा।
इस इकाई का संचालन और विपणन पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा। 36.47 करोड़ रुपये की लागत से यहां क्वारेंटाइन बिल्डिंग, प्री-प्रोसेसिंग यूनिट, मटेरियल स्टोरेज और मेन प्लांट बिल्डिंग आदि तैयार किए गए हैं।
हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट भी शुरू
इसके अलावा, 6.04 एकड़ में 23.24 करोड़ रुपये की लागत से हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट भी स्थापित की गई है। यहां गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों से आधुनिक मशीनरी के ज़रिए अर्क निकाला जाएगा, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों और वेलनेस उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना से 2000 से अधिक स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही आदिवासी, वनवासी और महिला समूहों को लघु वनोपजों के संग्रहण, प्राथमिक प्रसंस्करण और औषधीय निर्माण कार्यों में व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। इससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।
मायने
छत्तीसगढ़ में यह परियोजना न केवल प्रदेश को हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों का हब बनाएगी, बल्कि वनों पर आश्रित समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।
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