छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 29 आबकारी अफसरों की चार्जशीट, करोड़ों की डील का खुलासा, जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 29 आबकारी अफसरों की चार्जशीट, करोड़ों की डील का खुलासा, जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े शराब घोटाले में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 29 आबकारी अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में चार्जशीट किया है। मगर इस कार्रवाई के पीछे भी एक और भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन तमाम अधिकारियों को पहले ही ‘अविश्वस्त’ कर दिया गया था कि कोर्ट में पेशी के दौरान उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। एक आबकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि करोड़ों की डील एक सीनियर आईपीएस अधिकारी के जरिए फाइनल की गई है। उस अफसर ने सभी दोषी अधिकारियों को भरोसा दिया कि वे बेफिक्र होकर कोर्ट में पेश हों, कोई गिरफ्तारी नहीं होगी।
सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ दावा सवालों के घेरे में
भले ही राज्य में भाजपा सरकार जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, लेकिन अंदरखाने करोड़ों की लेन-देन और मलाईदार पोस्टिंग के लिए होड़ मची है। आबकारी विभाग के कई बड़े अफसर पहले ही सलाखों के पीछे हैं, जबकि जिला स्तर के अधिकारियों ने भी मिलकर सिंडिकेट बनाकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
कोर्ट को गुमराह कर बचने की कोशिश
सूत्रों का दावा है कि इन अधिकारियों से पहले ही भारी रकम वसूल ली गई है और कोर्ट में जल्द ही उन्हें राहत दिलाने के नाम पर करोड़ों की उगाही भी की जा रही है। यह पूरा मामला इस कहावत को चरितार्थ कर रहा है — ‘इस दुनिया में बाप न भाइया सबसे बड़ा रुपैया।’
सिद्धार्थ सिंघानिया का मामला भी विवादों में
इस घोटाले में एक और हैरान करने वाला पहलू सामने आया है। शराब कारोबार में पावर सप्लाई मैनेजमेंट देखने वाले सिद्धार्थ सिंघानिया पर झारखंड सरकार ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज कर कार्रवाई की, लेकिन छत्तीसगढ़ में उनसे केवल औपचारिक पूछताछ कर छोड़ दिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक ही व्यक्ति के खिलाफ दो राज्यों में अलग-अलग कार्रवाई क्यों? क्या छत्तीसगढ़ में सिंघानिया को भी किसी 'डील' के तहत बचाया गया?
जांच एजेंसी की भूमिका पर उठे सवाल
अब सवाल सिर्फ घोटाले पर नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों की साख पर भी उठने लगे हैं। क्या करोड़ों की लेन-देन से अफसरशाही और जांच एजेंसियां भी बिक रही हैं? क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति केवल दिखावा है?
इस शराब घोटाले ने न सिर्फ सिस्टम की पोल खोल दी है, बल्कि मौजूदा सरकार के लिए भी बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया है।
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