नवीन युग के वित्तीय अपराधों से निपटने छत्तीसगढ़ पुलिस की तैयारी तेज, 300 पुलिस अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण

Chhattisgarh Police steps up preparations to tackle modern-day financial crimes; 300 police officers undergo training.
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नवीन युग के वित्तीय अपराधों से निपटने छत्तीसगढ़ पुलिस की तैयारी तेज, 300 पुलिस अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण

नवीन युग के वित्तीय अपराधों से निपटने छत्तीसगढ़ पुलिस की तैयारी तेज, 300 पुलिस अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण

राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी में कार्यशाला का आयोजन, DGP ने किया उद्घाटन; साइबर फ्रॉड की त्वरित कार्रवाई पर दिया जोर

रायपुर/चंदखुरी, 8 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में तेजी से बदलते साइबर एवं वित्तीय अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस की तकनीक-सक्षम और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी में ‘नवीन युग के वित्तीय अपराध एवं त्वरित प्रतिक्रिया की तैयारी’ विषय पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) जी.पी. सिंह ने किया। इसमें पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 300 पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बदलते साइबर अपराधों की दी गई जानकारी

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य फील्ड में तैनात पुलिस अधिकारियों को साइबर-वित्तीय अपराधों के बदलते तौर-तरीकों, डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेन-देन की ट्रैकिंग और अपराध की सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की आधुनिक कार्यप्रणाली से परिचित कराना था।

साइबर अपराध और वित्तीय अपराधों की जांच के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने अधिकारियों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की। कार्यशाला को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए इसे व्यावहारिक, संवादात्मक और फील्ड-उन्मुख बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

स्मार्टफोन और म्यूल अकाउंट से अपराधियों का नया नेटवर्क

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर DGP जी.पी. सिंह ने कहा कि अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। तकनीक आधारित वित्तीय अपराध पारंपरिक पुलिसिंग के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अपराधी हजारों किलोमीटर दूर बैठकर स्मार्टफोन, हैक किए गए बैंक खातों, म्यूल अकाउंट नेटवर्क और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर कुछ ही मिनटों में रकम को कई खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं। अपराध भले ही डिजिटल हो, लेकिन पीड़ित की आर्थिक क्षति और पुलिस की जिम्मेदारी पूरी तरह वास्तविक है।

इन साइबर फ्रॉड पर हुई विशेष चर्चा

कार्यशाला में कई तरह के उभरते साइबर-वित्तीय अपराधों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें प्रमुख रूप से—

निवेश और ट्रेडिंग घोटाले

डिजिटल लेंडिंग फ्रॉड

फर्जी KYC और प्रतिरूपण

UPI एवं QR कोड धोखाधड़ी

रिमोट एक्सेस एप्लीकेशन

दुर्भावनापूर्ण APK

बिजनेस ई-मेल कम्प्रोमाइज

क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराध

संगठित म्यूल-अकाउंट नेटवर्क

शामिल रहे।

Golden Hour’ में कार्रवाई पर जोर

DGP ने साइबर-वित्तीय अपराधों में ‘Golden Hour’ के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में हर मिनट आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ घंटों की देरी में ठगी की रकम कई बैंक खातों और अलग-अलग न्यायक्षेत्रों में ट्रांसफर हो सकती है, जिससे रकम की रिकवरी मुश्किल हो जाती है।

उन्होंने पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया के लिए पांच प्रमुख सिद्धांत बताए—

REPORT → TRACE → FREEZE → PRESERVE → INVESTIGATE

रिपोर्ट करें → ट्रेस करें → फ्रीज करें → साक्ष्य सुरक्षित रखें → जांच करें

इन सभी प्रक्रियाओं को जहां तक संभव हो, समानांतर और समन्वित तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।

सिर्फ पैसा कहां गया नहीं, अपराध के पीछे कौन है—यह पता करना जरूरी

कार्यशाला में जांच अधिकारियों को साइबर-वित्तीय अपराधों को केवल एक व्यक्ति के साथ हुई धोखाधड़ी के रूप में न देखने की सलाह दी गई। इसके पीछे मौजूद पूरे आपराधिक नेटवर्क की पहचान को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

जांचकर्ताओं को पीड़ित से डिवाइस, डिवाइस से डिजिटल फुटप्रिंट, डिजिटल फुटप्रिंट से लेन-देन, लेन-देन से म्यूल अकाउंट और फिर पूरे आपराधिक नेटवर्क तक सभी कड़ियों को जोड़ने पर जोर दिया गया।

बैंक, फिनटेक और टेलीकॉम कंपनियों के साथ समन्वय जरूरी

कार्यशाला में यह भी स्पष्ट किया गया कि साइबर-वित्तीय अपराधों से प्रभावी मुकाबला केवल पुलिस के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए बैंकों, भुगतान नेटवर्क, फिनटेक कंपनियों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और अन्य जांच एवं नियामक एजेंसियों के साथ तेज और प्रभावी समन्वय जरूरी है।

कार्यशाला को PHD Chamber of Commerce and Industry, Visa तथा Development Leaders Alliance का सहयोग प्राप्त हुआ।

डिजिटल सोच वाले जांचकर्ताओं की जरूरत

DGP जी.पी. सिंह ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को केवल नई तकनीकों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। जरूरत ऐसे जांचकर्ताओं की है जो डिजिटल दृष्टिकोण से सोचें, वित्तीय कोण से जांच करें और तेजी से कार्रवाई करें।

उन्होंने अधिकारियों से अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा करने, वास्तविक मामलों की चुनौतियों पर चर्चा करने और कठिन सवाल उठाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की असली कसौटी यह नहीं है कि अधिकारी कक्षा से बाहर निकलते समय कितना याद रखते हैं, बल्कि यह है कि अगली बार कोई पीड़ित पुलिस के पास पहुंचे तो पुलिस उसके लिए क्या अलग और बेहतर कर पाती है।

साइबर अपराधियों से आगे रहने की चुनौती

कार्यशाला में यह संदेश भी दिया गया कि साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों को अपना रहे हैं और अपने अपराध के तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। ऐसे में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को भी तेजी से सीखना, तेजी से अनुकूलित होना और तेजी से प्रतिक्रिया देना होगा।

यदि अपराधी अलग-अलग राज्यों और न्यायक्षेत्रों में सक्रिय हैं तो पुलिस का समन्वय भी उसी स्तर का होना चाहिए। यदि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जांचकर्ताओं को भी तकनीकी रूप से दक्ष होना होगा।

छत्तीसगढ़ पुलिस की Response Readiness होगी मजबूत

इस कार्यशाला से छत्तीसगढ़ पुलिस की Response Readiness को मजबूत करने, साइबर-वित्तीय अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी बनाने, ठगी गई रकम की रिकवरी की संभावनाओं को बढ़ाने और नागरिकों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

— नेताजी सुभाष चंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी

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