छत्तीसगढ़ में 16वीं जनगणना की तैयारी शुरू, पिंगुआ को बनाया गया जिला प्रभारी; लीक रिपोर्ट से सामने आए जातिगत आंकड़े
भारत में 2027 में आयोजित होने वाली 16वीं राष्ट्रीय जनगणना की तैयारियाँ अभी से शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य में जनगणना कार्यों की ज़िम्मेदारी अधिकारियों को सौंपनी शुरू हो गई है। बिलासपुर जिले के पिंगुआ को इस जनगणना के लिए प्रभारी बनाया गया है। यह पहला संकेत है कि सरकार अब जनगणना को लेकर सक्रिय कदम उठा रही है।
गौरतलब है कि देशभर में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के कारण टल गई थी। अब 2027 में यह होने जा रही है और इसे लेकर एक बड़ी बात यह है कि इस बार जातिगत जनगणना (कास्ट सेंसस) को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है।
छत्तीसगढ़ के जातिगत आंकड़ों की लीक रिपोर्ट पहले ही सोशल मीडिया पर सामने आ चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य की करीब 75% से ज्यादा जनसंख्या OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग), SC (अनुसूचित जाति) और ST (अनुसूचित जनजाति) वर्गों से आती है।
इस कथित लीक रिपोर्ट में बताया गया है कि—
OBC की हिस्सेदारी लगभग 42% तक है,
SC की लगभग 13% और
ST की संख्या 30% के आसपास बताई जा रही है।
जबकि सवर्ण वर्ग की जनसंख्या कुल आबादी का महज 12% से कम है।
हालांकि यह रिपोर्ट आधिकारिक नहीं है, लेकिन इसके लीक होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। ऐसे आंकड़े आगामी चुनावी रणनीतियों को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं, खासकर सामाजिक समीकरण और आरक्षण नीति के संदर्भ में।
राज्य सरकार की तरफ से फिलहाल इस रिपोर्ट पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन यह तय है कि 2027 की जनगणना में कास्ट सेंसस की भूमिका एक बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।
जनगणना की ज़िम्मेदारी जिन अफसरों को दी जा रही है, उनमें पिंगुआ जैसे अनुभवी अफसरों की नियुक्ति यह संकेत देती है कि केंद्र और राज्य सरकारें इस प्रक्रिया को संवेदनशीलता और सटीकता से संपन्न करना चाहती हैं।
छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य में जातिगत आंकड़े न सिर्फ सामाजिक योजनाओं के पुनर्गठन में सहायक होंगे, बल्कि राजनीतिक दलों की रणनीति, बजट वितरण, और आरक्षण नीतियों को भी नया आकार देंगे।
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