Big action in 600 crore rice scam, 600 करोड़ के चावल घोटाले में बड़ा एक्शन, अतिरिक्त संचालक राजीव कुमार जायसवाल हटाए गए
600 करोड़ के चावल घोटाले में बड़ा एक्शन, अतिरिक्त संचालक राजीव कुमार जायसवाल हटाए गए
रायपुर। छत्तीसगढ़ के खाद्य विभाग में हुए 600 करोड़ रुपए के चावल घोटाले ने राज्य की राजनीति और प्रशासन में भूचाल ला दिया है। इस घोटाले की आंच अब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गई है। खाद्य संचालनालय के अतिरिक्त संचालक राजीव कुमार जायसवाल को उनकी जिम्मेदारी मानते हुए पद से हटा दिया गया है। उन्हें खाद्य संचालनालय से मुक्त कर खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) डॉ. सुभाष राज सिंह के हस्ताक्षरित आदेश से हुई है। आदेश की पुष्टि खाद्य संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री निवास को भेजे गए पत्र से हुई है।
2021 से 2023 के बीच हुआ था घोटाला
जानकारी के अनुसार यह घोटाला वर्ष 2021 से 2023 की अवधि में हुआ था। आरोप है कि इस दौरान 600 करोड़ रुपए का बोगस चावल खरीद घोटाला हुआ। नागरिक आपूर्ति निगम ही राशन दुकानों को गुणवत्ता युक्त चावल भेजने का अधिकृत निकाय है, लेकिन घोटाले में खुले बाजार से निम्नस्तरीय और बोगस चावल खरीदकर राशन कार्डधारियों को वितरण किया गया।
इससे न केवल करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक घटिया चावल पहुंचा।
राकेश चौबे की शिकायत पर हुई कार्रवाई
हमर संगवारी के अध्यक्ष राकेश चौबे ने 08 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले की जांच को प्रभावित करने वाले अधिकारियों को तत्काल हटाया जाए।
इस पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनदर्शन प्रकरण क्रमांक 2500725001678 पर कार्रवाई करते हुए खाद्य संचालनालय से जवाब मांगा। इसके बाद विभाग ने स्पष्ट किया कि राकेश चौबे की शिकायत के परिपालन में ही राजीव कुमार जायसवाल को अतिरिक्त संचालक पद से हटाकर संयुक्त सचिव, खाद्य मंत्रालय में पदस्थ किया गया है।
जांच को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप
राकेश चौबे ने बताया कि कुछ दिनों पहले एक समाचार पत्र में भ्रामक खबर छपवाई गई थी, जिसमें चावल घोटाले से इंकार किया गया था। उन्होंने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि इस तरह की झूठी खबरों के जरिए जांच को कमजोर करने की कोशिश की गई।
उन्होंने दावा किया कि विधान सभा जांच समिति के सभापति और सचिव को वे घोटाले के प्रामाणिक दस्तावेज पहले ही सौंप चुके हैं। इन दस्तावेजों में यह साफ है कि खुले बाजार से बोगस चावल खरीद कर राशन दुकानों में भेजा गया।
सरकार पर विपक्ष का दबाव
इस मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि गरीबों के हक का चावल लूटने में बड़े अधिकारी और नेताओं की मिलीभगत है। विपक्ष यह भी सवाल उठा रहा है कि यदि अधिकारी दोषी हैं तो उन्हें मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे अहम पद पर क्यों भेजा गया?
आगे की राह
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस घोटाले की जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो पाएगी? 600 करोड़ के इस घोटाले में और कौन-कौन से अधिकारी या अन्य लोग शामिल हैं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल, अतिरिक्त संचालक राजीव कुमार जायसवाल को पद से हटाने को घोटाले की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन यह जांच और कार्रवाई की केवल शुरुआत है। गरीबों और आम जनता को न्याय तभी मिलेगा जब पूरे घोटाले में शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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