बस्तर अब नक्सल मुक्त: केंद्र सरकार ने हटाया माओवादी प्रभावित जिलों की सूची से, विशेष सहायता राशि पर लगी रोक
बस्तर अब नक्सल मुक्त: केंद्र सरकार ने हटाया माओवादी प्रभावित जिलों की सूची से, विशेष सहायता राशि पर लगी रोक
बस्तर, छत्तीसगढ़ | 28 मई 2025 — छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले को नक्सली हिंसा और माओवादी गतिविधियों से बड़ी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने बस्तर को अब माओवादी (नक्सल प्रभावित) जिलों की सूची से बाहर कर दिया है। इस निर्णय को राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि दशकों से बस्तर नक्सलवाद की आग में झुलसता रहा है।
बस्तर की सुरक्षा स्थिति में ऐतिहासिक सुधार
पिछले कुछ वर्षों में राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त रणनीति, स्थानीय पुलिस, CRPF और कोबरा बटालियन जैसे सुरक्षा बलों की सफल कार्यवाहियों के चलते नक्सली गतिविधियों में लगातार गिरावट आई है। इसके साथ ही बस्तर में अब स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े विकास कार्य सामान्य गति से चलने लगे हैं।
बस्तर जिले में मुख्य रूप से जगदलपुर, दरभा, बकावंड, लोहंडीगुड़ा और तोकापाल जैसे इलाके अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त घोषित किए गए हैं। यहां माओवादियों की पकड़ पहले काफी मजबूत मानी जाती थी।
बस्तर को अब नहीं मिलेगी नक्सल सहायता राशि
केंद्र सरकार की इस घोषणा के साथ ही बस्तर जिले को मिलने वाली नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लिए निर्धारित विशेष वित्तीय सहायता राशि पर भी रोक लगा दी गई है। अब बस्तर को उस फंडिंग श्रेणी से बाहर कर दिया गया है जो विशेष रूप से नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों के लिए दी जाती थी।
यह फैसला एक तरफ जहां शांति स्थापना की पुष्टि करता है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने विकास योजनाओं के लिए वैकल्पिक संसाधन जुटाने की चुनौती भी खड़ी करता है।
बस्तर संभाग के 7 में से 2 जिले अब नक्सल मुक्त
बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले 7 जिलों में से अब नारायणपुर और बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित किया गया है। यह सुरक्षा बलों की रणनीति, शासन के विकास प्रयासों और आम जनता की सहयोग भावना का मिला-जुला परिणाम है।
नक्सल मुक्त घोषित जिले:
बस्तर (मुख्यालय: जगदलपुर)
नारायणपुर
अन्य जिले – दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कांकेर और कोंडागांव – अभी भी आंशिक रूप से नक्सली प्रभाव में हैं, हालांकि वहां भी धीरे-धीरे स्थितियाँ सामान्य हो रही हैं।
प्रशासन और जनता की भूमिका रही अहम
बस्तर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने लगातार जन-जागरूकता अभियान, आत्मसमर्पण योजनाएं और विश्वास निर्माण कार्यक्रम चलाए हैं। इसके साथ ही आदिवासी समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाएं लागू की गईं।
बस्तर कलेक्टर का बयान:
> “यह सिर्फ एक प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक जीत है। जनता का सहयोग और सुरक्षा बलों का समर्पण ही इसकी असली ताकत रहे।”
आगे की चुनौती: विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखना
हालांकि बस्तर अब नक्सल मुक्त घोषित हो चुका है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को बनाए रखना और विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाना ही अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को चाहिए कि वह नक्सली श्रेणी से बाहर होने के बावजूद बस्तर के लिए विशेष विकास फंडिंग की व्यवस्था बनाए रखे।
निष्कर्ष
बस्तर का नक्सली सूची से बाहर निकलना एक ऐतिहासिक मोड़ है — यह न सिर्फ सुरक्षा बलों और प्रशासन की सफलता का प्रतीक है, बल्कि बस्तर की आम जनता के आत्मविश्वास और बदलाव की भावना का भी प्रमाण है। अब बस्तर के लिए अगला अध्याय शांति, शिक्षा और समृद्धि का होगा।
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