भगोड़ा तोमर ब्रदर्स पर गिरफ्तारी वारंट, 14 जुलाई तक हाजिर न होने पर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई तय

Arrest warrant issued against fugitive Tomar brothers, action to confiscate property set भगोड़ा तोमर ब्रदर्स पर गिरफ्तारी वारंट, 14 जुलाई तक हाजिर न होने पर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई तय
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भगोड़ा तोमर ब्रदर्स पर गिरफ्तारी वारंट, 14 जुलाई तक हाजिर न होने पर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई तय

भगोड़ा तोमर ब्रदर्स पर गिरफ्तारी वारंट, 14 जुलाई तक हाजिर न होने पर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई तय

रायपुर। राजधानी रायपुर में सूदखोरी, धमकी, वसूली और मारपीट के कई मामलों में फरार चल रहे चर्चित तोमर ब्रदर्स के खिलाफ कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। रायपुर की विशेष अदालत ने शुक्रवार को वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए 14 जुलाई तक पुलिस के समक्ष पेश होने का सख्त आदेश दिया है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दोनों आरोपी तय समय सीमा में हाजिर नहीं होते, तो उनकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

कौन हैं तोमर ब्रदर्स?

तोमर ब्रदर्स — वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर — राजधानी रायपुर और आसपास के जिलों में सूदखोरी, अवैध वसूली, धमकी और मारपीट के मामलों में कुख्यात नाम हैं। इन पर लंबे समय से अलग-अलग थानों में केस दर्ज हैं, लेकिन दोनों लगातार फरार चल रहे थे। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के लिए कई शहरों में दबिश भी दी, मगर दोनों का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।

 अब तक कितने केस दर्ज?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक तोमर ब्रदर्स और उनके साथियों के खिलाफ कुल 12 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इनमें सूदखोरी, हत्या की धमकी, मारपीट, अपहरण, जबरन वसूली और फाइनेंस धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं।

वीरेंद्र तोमर पर 6 और रोहित तोमर पर 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

 फाइनेंस कंपनियों और कारोबारियों की भी शिकायतें

इतना ही नहीं, बैंक और फाइनेंस कंपनियों ने भी दोनों भाइयों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। पुलिस इन मामलों में लेन-देन के दस्तावेजों और अवैध उधारी के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, होटल व्यवसायी जगन्नाथ अग्रवाल ने भी रोहित तोमर के खिलाफ 15 लाख रुपये के लेन-देन किया था बदले 51लाख रुपए दे चुका थे उसके बाद बात भी तोमर बंधु और 25  लाख मग रहे थे  न देने पर होटल कब्जा करने की धमकी देते थे होटल व्यवसाई  ने पुरानी में FIR दर्ज कराई ।

 अब तक की कार्रवाई और घटनाक्रम

👉 30 जून 2025: होटल में रोहित तोमर ने प्रॉपर्टी डीलर दर्शन चावला के साथ मारपीट की।

👉 1 जुलाई 2025: मामले में थाना सिविल लाइन में केस दर्ज।

👉 2 जुलाई 2025: पुलिस ने सर्च वारंट के साथ तोमर ब्रदर्स के घर दबिश दी। तलाशी में अवैध हथियार, उधारी के दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद।

👉 3 जुलाई 2025: परिवार के खिलाफ सूदखोरी और वसूली के दो और केस दर्ज।

👉 4 जुलाई 2025: एक अन्य मामला दर्ज।

 

पुलिस की कई शहरों में दबिश

दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने रायपुर, भाटागांव, दुर्ग, राजस्थान और दिल्ली तक दबिश दी है। दोनों के मोबाइल फोन भी लगातार बंद हैं और वे लगातार लोकेशन बदलते हुए फरार हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तोमर ब्रदर्स की गतिविधियों और उनके लेन-देन नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

 14 जुलाई तक हाजिर न होने पर संपत्ति कुर्की

अदालत ने साफ आदेश दिया है कि यदि वीरेंद्र और रोहित तोमर 14 जुलाई 2025 तक पुलिस के सामने पेश नहीं होते, तो उनकी सभी संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए पुलिस ने संपत्ति का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कुर्की की कार्रवाई के लिए प्राथमिक सूची में रायपुर और दुर्ग में स्थित उनकी अचल संपत्तियों और लग्जरी वाहनों को शामिल किया गया है।

 जमानत खारिज कराने की तैयारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और वकीलों ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज कराने की अर्जी भी कोर्ट में दाखिल कर दी है।

 कहां-कहां हैं संपत्तियां?

सूत्रों के मुताबिक, तोमर ब्रदर्स की रायपुर, भाटागांव, दुर्ग, राजनांदगांव और राजस्थान के कुछ इलाकों में जमीनें, मकान और फार्म हाउस हैं। पुलिस ने इनकी सूची तैयार कर ली है, जिन्हें कोर्ट के आदेश के बाद कुर्क किया जाएगा।

 पुलिस ने जनता से भी की अपील

पुलिस ने आम नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि यदि किसी ने तोमर ब्रदर्स या उनके साथियों से सूद पर पैसे लिए हैं या किसी तरह की धमकी व वसूली का सामना किया है, तो नजदीकी थाने में सूचना दें।

 अब 14 जुलाई का इंतज़ार

सभी की निगाहें अब 14 जुलाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि तोमर ब्रदर्स पुलिस के सामने हाजिर होते हैं या फिर उनकी संपत्तियां कुर्क कर ली जाती हैं।

यह मामला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सूदखोरी और अवैध वसूली के नेटवर्क का पर्दाफाश माना जा रहा है।

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