मां ने खुद के हाथों ली चार बच्चों की जान, जिंदा बचे बेटे की गवाही से कोर्ट ने सुनाई फांसी

After Avnish's death, the mother crossed all limits of cruelty, threw four children into the river - the surviving child became a witness, the court sentenced her to death अवनीश की मौत के बाद मां ने पार की हैवानियत की हदें, चार बच्चों को नदी में फेंका — बचा बच्चा बना गवाह, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
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अवनीश की मौत के बाद मां ने पार की हैवानियत की हदें, चार बच्चों को नदी में फेंका — बचा बच्चा बना गवाह, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

औरैया (उत्तर प्रदेश)। साल 2020 में उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। एक महिला ने अपने ही चार मासूम बच्चों को नदी में फेंक दिया था। इस दर्दनाक हादसे में तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि किस्मत से एक बच्चा किसी तरह बच निकला था। आज उसी बच्चे की गवाही ने अपनी मां को कानून के कठघरे में खड़ा कर दिया और अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला

साल 2020 में प्रियंका के पति अवनीश की करंट लगने से मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद प्रियंका अपने चचेरे देवर आशीष के साथ रहने लगी। लेकिन आशीष ने प्रियंका के बच्चों को अपनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद प्रियंका ने इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला कदम उठाते हुए अपने चार मासूम बच्चों को नदी में फेंक दिया।

इस घटना में तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, किस्मत से एक बच्चा किसी तरह जिंदा बच निकला। उस वक्त मासूम बच्चा अपनी मां का यह खौफनाक चेहरा देखकर दहशत में था, लेकिन समय के साथ उसने अपने बयान में पूरी सच्चाई बयान की।

बच्चे की गवाही बनी अहम सबूत

अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और बच्चे की गवाही ने पूरे मामले का सच उजागर कर दिया। मासूम ने अदालत में बताया कि किस तरह उसकी मां ने अपने ही हाथों से भाई-बहनों सहित उसे नदी में फेंका था।

अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

सभी गवाहों और सबूतों को मद्देनजर रखते हुए अदालत ने आरोपी मां प्रियंका को दोषी करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में इसे समाज के लिए अत्यंत जघन्य अपराध बताते हुए प्रियंका को फांसी की सजा सुनाई।

इलाके में चर्चा का विषय बनी घटना

यह फैसला आते ही पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जिसने जन्म दिया वही मौत का फरमान सुना दे, इससे बड़ा अपराध और कुछ नहीं हो सकता।

समाज में जागरूकता की जरूरत

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पारिवारिक टूटन, सामाजिक असुरक्षा और मानसिक अवसाद किस हद तक इंसान को हैवान बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक विवाद सुलझाने की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए।

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