Adani Power government land अडानी पावर पर रायगढ़ में सरकारी भूमि कब्ज़े का आरोप, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन

अडानी पावर पर रायगढ़ में सरकारी भूमि कब्ज़े का आरोप, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
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Adani Power government land अडानी पावर पर रायगढ़ में सरकारी भूमि कब्ज़े का आरोप, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन

अडानी पावर पर रायगढ़ में सरकारी भूमि कब्ज़े का आरोप, ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन

रायगढ़। रायगढ़ जिले के ग्राम छोटे भंडार (तहसील पुसौर) में अडानी पावर लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने सरकारी भूमि, तालाब, नहर और सार्वजनिक रास्तों पर अवैध कब्ज़ा कर लिया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर रायगढ़ को ज्ञापन सौंपा है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

सीमांकन में हुआ खुलासा

ग्रामीणों के अनुसार, यह विवाद नया नहीं है। 28 फरवरी 2024 को राजस्व विभाग के अधिकारियों ने ग्राम छोटे भंडार क्षेत्र का सीमांकन कराया था। इस सीमांकन रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी ने कई खसरा नंबरों की भूमि पर कब्ज़ा कर लिया है, जिनका उपयोग गांव के तालाब, नहर और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए होना चाहिए था।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने सीमांकन रिपोर्ट आने के बावजूद अब तक कब्ज़ा खाली नहीं किया है।

विवादित खसरा नंबर और रीडिंग

ग्रामीणों की शिकायत में बताया गया है कि जिन खसरा नंबरों पर कब्ज़ा पाया गया है, उनमें प्रमुख हैं:

खसरा नंबर 54/4 (0.045 हेक्टेयर)

खसरा नंबर 2/1 (0.227 हेक्टेयर)

खसरा नंबर 482 (0.498 हेक्टेयर)

इसके अलावा, कई अन्य खसरा नंबरों को भी कंपनी के कब्ज़े में बताया गया है। इनमें—

459, 463, 465, 467, 472, 522, 524, 536/6, 557, 563 शामिल हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि इन जमीनों की OHT रीडिंग (लाइन लोड) भी दर्ज की गई है। रीडिंग इस प्रकार हैं: 0.3688, 0.2633, 0.1468, 0.1821, 0.0818, 0.2025, 0.1054, 0.1748, 0.1828 आदि।

ग्रामीणों की आपत्ति

ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने केवल खेत और तालाब की जमीन ही नहीं कब्जाई, बल्कि गांव की सड़क और नहर मार्ग को भी बाधित कर दिया है। इससे आवागमन में कठिनाई हो रही है और किसानों को सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने में बाधा आ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। सीमांकन रिपोर्ट को आधार मानकर अवैध कब्ज़ा हटाया जाना चाहिए, लेकिन अब तक केवल कागज़ी कार्यवाही ही की गई है।

प्रशासन से मांगी गई कार्रवाई

ग्रामीणों ने कलेक्टर रायगढ़ से मांग की है कि—

1. तुरंत कंपनी का अवैध कब्ज़ा हटाया जाए।

2. सीमांकन रिपोर्ट को लागू कर भूमि को मुक्त कराया जाए।

3. कंपनी की मदद करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

प्रशासन की चुप्पी

फिलहाल यह मामला कलेक्टर रायगढ़ के संज्ञान में है। कलेक्टर कार्यालय ने ग्रामीणों के ज्ञापन की पुष्टि की है, लेकिन अभी तक किसी तरह की आधिकारिक कार्रवाई या बयान सामने नहीं आया है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से शिकायत करते आ रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही और कंपनी के दबाव के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

बड़ी कंपनियों पर ग्रामीणों का सवाल

यह मामला केवल जमीन कब्ज़े तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव बनाम उद्योग का एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब बड़ी कंपनियां सरकारी भूमि और सार्वजनिक संसाधनों पर कब्ज़ा करती हैं, तो आम लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं। तालाब और नहर जैसी सार्वजनिक सुविधाओं पर कब्ज़ा करने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि किसानों की आजीविका पर भी सीधा असर पड़ता है।

आंदोलन की तैयारी

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कब्ज़ा नहीं हटाया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि अब यह मामला केवल जमीन का नहीं बल्कि गांव की गरिमा और अस्तित्व से जुड़ा हुआ है।

मायने

ग्राम छोटे भंडार में अडानी पावर लिमिटेड पर लगे ये आरोप कंपनी और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती हैं। एक तरफ ग्रामीण अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन की निष्क्रियता सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कलेक्टर कार्यालय इस मामले में किस तरह की कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है।

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