छत्तीसगढ़ में 750 स्वास्थ्य मितानों की नौकरी संकट में, तीन महीने से नहीं मिली तनख्वाह — स्वास्थ्य मंत्री से की गुहार
छत्तीसगढ़ में 750 स्वास्थ्य मितानों की नौकरी संकट में, तीन महीने से नहीं मिली तनख्वाह — स्वास्थ्य मंत्री से की गुहार
रायपुर | स्वास्थ्य संवाददाता छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी माने जाने वाले 750 स्वास्थ्य मितान इस समय गहरे संकट में हैं। थर्ड पार्टी कंपनी FHPL का टेंडर समाप्त होने के बाद से न केवल उनकी नौकरी खतरे में है, बल्कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन भी नहीं मिला है। स्थिति से परेशान होकर सैकड़ों स्वास्थ्य मितान राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बंगले पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
क्या है मामला?
स्वास्थ्य मितानों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा थर्ड पार्टी एजेंसी FHPL (Family Health Plan Insurance TPA Ltd.) के माध्यम से की गई थी। इन मितानों की सेवाएं केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजना "आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY)" के अंतर्गत ली जा रही थीं।
लेकिन 30 अप्रैल 2025 को FHPL का टेंडर समाप्त होते ही बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के मितानों की सेवाएं रोक दी गईं। इसके चलते वे एक झटके में बेरोजगार हो गए हैं।
मितानों की स्थिति — "काम किया, वेतन नहीं मिला"
प्रभावित स्वास्थ्य मितानों ने बताया कि:
उन्हें फरवरी 2025 से वेतन नहीं मिला है।
कई मितान दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे।
इन मितानों ने कोरोना काल, ग्रामीण क्षेत्रों की स्क्रीनिंग, और अस्पताल पहुंच सेवा में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
मंत्री से मुलाकात, मिला आश्वासन
शुक्रवार को रायपुर में सैकड़ों स्वास्थ्य मितान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिलने पहुंचे। उन्होंने "स्टेट नोडल एजेंसी में कलेक्टर दर पर समायोजन" की मांग की।
इस पर मंत्री ने कहा:
> “आपका अनुभव सरकार के लिए बहुमूल्य है। हम इस विषय को गंभीरता से लेंगे और जल्द ही समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।”
हालांकि, अब तक कोई औपचारिक निर्णय या आदेश जारी नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य मितान: योजनाओं की ज़मीन पर मजबूत नींव
स्वास्थ्य मितान, आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत:
मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने,
योजना से जुड़े डॉक्युमेंटेशन में मदद करने,
लाभार्थियों को योजना की जानकारी देने,
और विभिन्न शिविरों में सहायक भूमिका निभाने जैसे अहम कार्य करते हैं।
इन मितानों के हटने से योजना की ज़मीनी क्रियान्वयन में रुकावट आ सकती है।
मितानों की मुख्य मांगें
1. स्टेट नोडल एजेंसी के अंतर्गत समायोजन।
2. तीन माह का लंबित वेतन तुरंत दिया जाए।
3. भविष्य में सेवा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
4. नियमित भर्ती प्रक्रिया या संविदा विस्तार किया जाए।
विशेषज्ञों और समाजसेवियों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और RTI कार्यकर्ताओं का मानना है कि:
> “अगर इन मितानों को हटाया जाता है तो यह योजना के प्रदर्शन पर सीधा असर डालेगा। इन्हें अनुभव और सेवाभाव के आधार पर बनाए रखा जाना चाहिए।”
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में योगदान देने वाले 750 स्वास्थ्य मितान आज खुद नौकरी और वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वो इस विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित निर्णय ले, जिससे इन कर्मचारियों की रोज़गार सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और आयुष्मान भारत योजना की गति भी बनी रहे।
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