बाली के सागर में मिली 5000 साल पुरानी भगवान विष्णु की मूर्ति, भारत-ब्रिटेन-इंडोनेशिया की संयुक्त खोजी दल की ऐतिहासिक सफलता
बाली के सागर में मिली 5000 साल पुरानी भगवान विष्णु की मूर्ति, भारत-ब्रिटेन-इंडोनेशिया की संयुक्त खोजी दल की ऐतिहासिक सफलता
बाली (इंडोनेशिया): इतिहास और पुरातत्व की दुनिया में एक चमत्कारी खोज सामने आई है। भारत, ब्रिटेन और इंडोनेशिया के संयुक्त खोजी दल ने बाली के निकट समुद्र की गहराई में भगवान विष्णु की एक अत्यंत प्राचीन मूर्ति की खोज की है। हैरानी की बात यह है कि यह मूर्ति शेषनाग की शैय्या पर विराजमान भगवान विष्णु की मुद्रा में है और वैज्ञानिकों के अनुसार, इसकी उम्र 5000 साल से भी अधिक बताई जा रही है।
समुद्र के गर्भ में छिपा सनातन रहस्य
इस खोज में लगे समुद्री पुरातत्वविदों ने बताया कि यह मूर्ति समुद्र तल से लगभग 120 फीट नीचे स्थित है और चारों ओर प्रवाल भित्तियों से घिरी हुई है। मूर्ति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह सैकड़ों वर्षों से जल के भीतर सुरक्षित रूप से विराजमान हो।
वैज्ञानिकों और पुरातत्व विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
वैज्ञानिकों ने कार्बन डेटिंग और अन्य परीक्षणों के आधार पर अनुमान लगाया है कि यह मूर्ति सिंधु घाटी सभ्यता या उससे भी पूर्व की हो सकती है। भारत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज प्राचीन समुद्री सांस्कृतिक संबंधों की पुष्टि करती है और संभवतः किसी जलमग्न सभ्यता का हिस्सा रही हो सकती है।
आस्था और इतिहास का संगम
इस खोज ने न केवल ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को उजागर किया है, बल्कि आस्था और संस्कृति से भी गहरा संबंध जोड़ दिया है। विष्णु भगवान की शेषशैय्या मुद्रा हिंदू धर्म में संरक्षण और संतुलन का प्रतीक मानी जाती है।
तीनों देशों में उत्साह और गौरव
भारत, ब्रिटेन और इंडोनेशिया तीनों देशों की सरकारों और शोध संस्थानों ने इस खोज को ऐतिहासिक करार दिया है। भारत में विशेष रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों ने इसे सनातन संस्कृति की वैश्विक उपस्थिति का प्रमाण बताया है।
बाली के समुद्र में मिली 5000 साल पुरानी भगवान विष्णु की मूर्ति।
भारत, ब्रिटेन और इंडोनेशिया के संयुक्त खोजी दल की ऐतिहासिक उपलब्धि।
मूर्ति शेषनाग की शैय्या पर विराजमान मुद्रा में है।
खोज से प्राचीन समुद्री सभ्यताओं और सनातन संस्कृति के वैश्विक विस्तार की पुष्टि।
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