कोरबा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से 15 बकरियों की मौत, तीन किसानों को भारी नुकसान
कोरबा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से 15 बकरियों की मौत, तीन किसानों को भारी नुकसान
कोरबा, छत्तीसगढ़ | 28 मई 2025 — छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मंगलवार दोपहर एक दर्दनाक घटना घटी, जब छुईडोडा सोल्वा गांव में आकाशीय बिजली गिरने से 15 बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब गांव के तीन किसान – रामलाल, दुलार और अमर सिंह – अपनी बकरियों को रोज़ की तरह चराने के लिए पास के मैदान में ले गए थे।
घटना का पूरा विवरण
मंगलवार सुबह से ही जिले में मौसम अस्थिर बना हुआ था। हल्की बारिश के साथ कभी-कभी तेज गर्जना और बिजली चमकने की स्थिति बनी रही। लगभग दोपहर के समय किसान अपनी बकरियों को लेकर खेत की ओर गए थे। बकरियां मैदान में चर रही थीं कि अचानक आसमान में बिजली चमकने लगी। डर के मारे सभी बकरियां पास के एक पेड़ के नीचे एकत्र हो गईं। उसी वक्त एक तेज गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली ठीक उसी पेड़ पर आ गिरी, जिससे सभी 15 बकरियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
किस्मत से किसान खुद सुरक्षित रहे, क्योंकि वे थोड़ी दूरी पर एक अन्य पेड़ के नीचे खड़े थे। घटना ने गांव में शोक और भय का माहौल पैदा कर दिया है।
किसानों को हुआ आर्थिक नुकसान
इस हादसे से तीन किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। मृत बकरियों की औसत कीमत ₹5,000 से ₹7,000 के बीच आंकी जा रही है, जिससे अनुमानित कुल नुकसान ₹1 लाख से अधिक का है। किसानों ने बताया कि बकरियां उनके लिए आय का एक प्रमुख स्रोत थीं, और इस नुकसान से उनकी आजीविका पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच के बाद प्रशासन ने घटना की पुष्टि की और राजस्व परिपत्र के तहत प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसानों को यथाशीघ्र राहत राशि प्रदान की जाएगी।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में जिले के कई क्षेत्रों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरतें, विशेषकर खुले मैदानों, पेड़ों और ऊंचे स्थानों से दूर रहें।
सावधानी ही सुरक्षा है
स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि बारिश या बिजली की आहट होते ही पशुओं को खुले मैदानों में न ले जाएं, और खुद भी सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। स्कूलों, पंचायत कार्यालयों और आंगनबाड़ियों में भी जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि प्रकृति कितनी अस्थिर और खतरनाक हो सकती है। जहां एक ओर मौसम की मार से इंसानी जान को खतरा रहता है, वहीं यह पशुधन पर भी भारी पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन की त्वरित सहायता और लोगों की सतर्कता ही नुकसान को कम करने का एकमात्र उपाय है।
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