health of children आंगनबाड़ियों और स्कूलों में बच्चों की सेहत परोस रही थाली
आंगनबाड़ियों और स्कूलों में बच्चों की सेहत परोस रही थाली
आंगनबाड़ियों और स्कूलों में बच्चों की सेहत परोस रही थाली
खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा और भजिया से बच्चों की थाली बनी पौष्टिक
रायपुर, 31 अगस्त 2025। कोरबा जिले की आंगनबाड़ियों और स्कूलों में अब बच्चों की थाली सिर्फ भूख नहीं मिटा रही, बल्कि उनकी सेहत और पढ़ाई में भी ऊर्जा भर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर डीएमएफ फंड से सुबह के नाश्ते की व्यवस्था शुरू की गई है। बच्चों को खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवई जैसे व्यंजन परोसे जा रहे हैं।
धुएं से मुक्ति, गैस से आसान रसोई
पहले लकड़ी के चूल्हे पर धुएं में पकता था खाना, लेकिन अब सभी आंगनबाड़ियों और स्कूलों में गैस सिलेण्डर की सुविधा उपलब्ध है। इससे रसोइयों को राहत मिली है और समय पर भोजन तैयार हो रहा है।
बच्चों की बढ़ रही रुचि
पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम धोबघाट की छात्रा प्रियांशी और नेहा ने बताया कि उन्हें रोज़ अलग-अलग स्वादिष्ट नाश्ता मिलता है।
प्रधान पाठक चैनसिंह पुहुप ने कहा कि सिलेंडर से खाना जल्दी बन जाता है और बच्चों की उपस्थिति में भी सुधार आया है।
लामपहाड़ गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुशीला तिर्की ने बताया कि नाश्ते का सीधा असर पहाड़ी कोरवा जनजाति के बच्चों पर दिख रहा है। जो बच्चे पहले जंगल चले जाते थे, वे अब समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं।
हर दिन अलग मेनू
सुबह करीब 10 बजे नाश्ता और दोपहर 1 बजे भोजन परोसा जाता है। बच्चों को कभी दलिया, तो कभी खीर-पूड़ी, पोहा-भजिया या सेवई खाने को मिलती है। इस व्यवस्था से बच्चों की उपस्थिति और स्वास्थ्य दोनों बेहतर हो रहे हैं।
पौष्टिक भोजन से भविष्य संवर रहा
जिले की 2602 आंगनबाड़ियों और 2,000 से अधिक स्कूलों में करीब सवा दो लाख बच्चे नाश्ते और मध्यान्ह भोजन से लाभान्वित हो रहे हैं।
48,217 बच्चे (6 माह से 3 वर्ष तक)
56,477 बच्चे (3 से 6 वर्ष तक)
73,810 विद्यार्थी (प्राइमरी स्कूल)
47,122 विद्यार्थी (मिडिल स्कूल)
सभी केंद्रों और स्कूलों में प्रतिमाह गैस सिलेंडर रिफिलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
माता-पिता भी खुश
पाली विकासखंड के पण्डोपारा गांव की पूजा पण्डो ने बताया कि पहले उसके बच्चे स्कूल जाने में आनाकानी करते थे, लेकिन अब वे रोज़ समय पर जाते हैं क्योंकि उन्हें स्वादिष्ट नाश्ता और गरम भोजन मिलता है।
यह पहल न सिर्फ बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें नियमित रूप से स्कूल और आंगनबाड़ी से जोड़ने का भी बड़ा माध्यम बन रही है।
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