नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत का 'सिंदूर घर-घर योजना' पर बड़ा बयान, कहा- महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़

Leader of Opposition Charan Das Mahant's big statement on 'Sindur Ghar-Ghar Yojana', said - tampering with women's dignityनेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत का 'सिंदूर घर-घर योजना' पर बड़ा बयान, कहा- महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़
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नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत का 'सिंदूर घर-घर योजना' पर बड़ा बयान, कहा- महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़

डॉ. चरण दास महंत ने राज्य सरकार की योजना पर उठाए सवाल, कहा— 'सिंदूर राजनीति महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध'

रायपुर, छत्तीसगढ़ |छत्तीसगढ़ में हाल ही में शुरू की गई 'सिंदूर घर-घर योजना' पर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने इस योजना को लेकर राज्य सरकार और मंत्रियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं के सम्मान के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है।

'सिंदूर' राजनीति नहीं, सम्मान का प्रतीक है: महंत

चरण दास महंत ने कहा, “छत्तीसगढ़ के मंत्री अगर अपने माथे पर सिंदूर लगाकर घूमना चाहते हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है, लेकिन इसे सरकारी योजना बनाकर प्रचारित करना सर्वथा अनुचित है।” उन्होंने यह भी कहा कि सिंदूर महिलाओं के वैवाहिक जीवन का पवित्र प्रतीक है, जिसे या तो पति लगाता है या ससुराल से आता है। इसे राजनीतिक हथियार बनाना, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है।

राजनीति में आस्था और परंपरा को घोलना खतरनाक

महंत ने चेताया कि राज्य सरकार को आस्था और परंपरा के विषयों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि “महिलाओं के अधिकार और सम्मान को लेकर अगर कोई योजना लाई जाती है, तो उसका उद्देश्य सशक्तिकरण होना चाहिए, न कि प्रतीकात्मक दिखावा।”

सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

नेता प्रतिपक्ष के इस बयान पर अभी तक राज्य सरकार या संबंधित मंत्रियों की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है और विशेषज्ञ इसे आगामी चुनावों के मद्देनज़र संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं।

क्या है 'सिंदूर घर-घर योजना'?

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत, विवाहिता महिलाओं को नि:शुल्क सिंदूर और पूजन सामग्री वितरित करने की बात कही गई है। सरकार का दावा है कि यह योजना संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से चलाई जा रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बता रहा है।

 यह मुद्दा न सिर्फ राजनीति बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा है। क्या सिंदूर जैसी भावनात्मक चीज को योजनाओं में शामिल करना उचित है?

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