धर्मांतरण और अंधविश्वास का खौफनाक खेल शैतान भगाने के नाम पर युवती की पसली तोड़ी इलाज के दौरान हुई मौत

Conversion and superstition terrible game in the name of expelling the devil, the girl broke her rib and died during treatment धर्मांतरण और अंधविश्वास का खौफनाक खेल शैतान भगाने के नाम पर युवती की पसली तोड़ी इलाज के दौरान हुई मौत
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धर्मांतरण और अंधविश्वास का खौफनाक खेल शैतान भगाने के नाम पर युवती की पसली तोड़ी इलाज के दौरान हुई मौत

धर्मांतरण और अंधविश्वास का खौफनाक खेल: ‘शैतान भगाने’ के नाम पर युवती की पसली तोड़ी, इलाज के दौरान हुई मौत

राजिम (गरियाबंद)। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम इलाके में अंधविश्वास और कथित चमत्कारी इलाज के चलते एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती की जान चली गई। मामला सुरसा बंधा क्षेत्र का है, जहां बाइबल पढ़ाकर और ‘शैतान भगाने’ के नाम पर एक महिला ने युवती को इलाज के बहाने इतना प्रताड़ित किया कि उसकी पसली टूट गई और इलाज के अभाव में मौत हो गई।

मृतका की मां सुनीता सोनवानी ने बताया कि उसकी बेटी योगिता सोनवानी मानसिक रूप से अस्वस्थ थी, जिसका इलाज रायपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने इलाज बीच में रोक दिया। इस दौरान उन्हें किसी ने बताया कि महासमुंद के सुरसा बंधा में एक महिला आयुर्वेद और चमत्कारी इलाज करती है।

परिजन उसे वहां ले गए, लेकिन इलाज के नाम पर जो कुछ हुआ वह दिल दहला देने वाला है। परिजनों का आरोप है कि महिला ईश्वरी साहू ने उन्हें शैतान के डर का हवाला देते हुए बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने को कहा। इसके बाद योगिता और उसकी मां को कथित रूप से तीन महीने तक बंधक बनाकर रखा गया।

'इलाज' के नाम पर बर्बरता

परिजनों के अनुसार, ईश्वरी साहू ने योगिता के सीने पर चढ़कर उसे 'शैतान भगाने' का प्रयास किया। इस दौरान योगिता की पसली टूट गई। लगातार बिगड़ती हालत के बावजूद न तो उसे अस्पताल ले जाया गया, न ही किसी चिकित्सकीय मदद की कोशिश की गई। अंतत: इलाज के नाम पर हुई इस बर्बरता ने योगिता की जान ले ली।

 न डॉक्टर – केवल प्रार्थना और चमत्कार

मृतका की मां का दावा है कि तीन महीनों तक न कोई दवा दी गई, न डॉक्टर को दिखाया गया। बस बंद कमरे में कथित प्रार्थनाएं और ‘शैतान भगाने’ की रस्में चलती रहीं। जब योगिता की हालत नाजुक हो गई, तब भी उसे अस्पताल नहीं ले जाया गया।

मामले में जांच की मांग

परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अंधविश्वास और धर्मांतरण के नाम पर चल रहे कथित चमत्कारी इलाज की आड़ में आखिर कब तक मासूम लोग शिकार बनते रहेंगे?

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