2022 की टैक्स इंस्पेक्टर परीक्षा रद्द, नियुक्तियां भी निरस्त; भाजपा ने भूपेश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
2022 की टैक्स इंस्पेक्टर परीक्षा रद्द, नियुक्तियां भी निरस्त; भाजपा ने भूपेश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
जांच में सामने आईं अनियमितताएं, एक जैसे उत्तर और रिकॉर्ड में खामियां मिलने का दावा; चयनित कर्मचारियों को मूल पदों पर लौटाया गया
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर विभाग में वर्ष 2022 में लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक (टैक्स इंस्पेक्टर) के पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित सीमित प्रतियोगिता परीक्षा को अनियमितताओं के चलते निरस्त कर दिया गया है। 26 जून 2022 को आयोजित इस परीक्षा के आधार पर 1 जुलाई 2022 को चयनित कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नियुक्ति दी गई थी। विभागीय जांच के बाद अब परीक्षा के साथ ही पूरी चयन प्रक्रिया और उससे जुड़े नियुक्ति आदेश भी निरस्त कर दिए गए हैं। प्रभावित कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर वापस भेजा जाएगा।
इस मामले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस की तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में परीक्षा और चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और प्रतिभावान कर्मचारियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ हुआ।
चार साल बाद जांच में सामने आईं अनियमितताएं
जानकारी के मुताबिक, 2022 की परीक्षा और चयन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद विभाग ने जांच समिति का गठन किया था। समिति ने परीक्षा और चयन से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की और 3 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर राज्य कर आयुक्त कार्यालय ने 11 सितंबर 2026 को परीक्षा और उससे जुड़ी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश जारी किया।
जांच में परीक्षा संचालन से लेकर उत्तरपुस्तिकाओं की जांच और अंतिम चयन तक कई स्तरों पर गंभीर खामियां सामने आने की बात कही गई है।
न रोस्टर का पालन, न उपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले आरक्षण रोस्टर का उचित पालन नहीं किया गया। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध नहीं था।
जांच में कुछ उत्तरपुस्तिकाओं में एक जैसे उत्तर पाए जाने की बात भी सामने आई है। इसके साथ ही उत्तरपुस्तिकाओं की गोपनीयता और कोडिंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।
भाजपा का आरोप है कि इन अनियमितताओं के कारण पूरी परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता संदेह के घेरे में आ गई।
पुनर्मूल्यांकन और उत्तरपुस्तिकाओं को लेकर भी सवाल
डॉ. मिश्रा ने आरोप लगाया कि चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। भाजपा के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों के अंकों में पुनर्मूल्यांकन के जरिए बदलाव किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
इसके अलावा खरीदी गई उत्तरपुस्तिकाओं और उपयोग में लाई गई तथा शेष उत्तरपुस्तिकाओं के रिकॉर्ड में भी विसंगतियां मिलने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर ही माना जाएगा।
पूरी परीक्षा निरस्त, नियुक्त कर्मचारी मूल पद पर लौटेंगे
विभागीय कार्रवाई का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है, जिन्हें इसी परीक्षा के आधार पर 2022 में वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाया गया था।
रिपोर्टों के अनुसार, विभाग ने यह माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ऐसे अभ्यर्थियों को विश्वसनीय रूप से अलग करना संभव नहीं था, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया अनियमितताओं से प्रभावित नहीं हुई हो। इसी वजह से केवल कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द करने या दोबारा मूल्यांकन कराने के बजाय पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को निरस्त किया गया।
भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस की तत्कालीन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं का खामियाजा मेहनत करने वाले कर्मचारियों और युवाओं को भुगतना पड़ा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चयन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हुआ था, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
भाजपा ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल एक परीक्षा को निरस्त किए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, आरक्षण व्यवस्था और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल सामने आते हैं।
अब आगे क्या?
2022 की परीक्षा रद्द होने के बाद उन कर्मचारियों की स्थिति बदल गई है, जिन्हें इसी चयन के आधार पर टैक्स इंस्पेक्टर बनाया गया था। विभागीय आदेश के मुताबिक उन्हें मूल पदों पर प्रत्यावर्तित किया जाएगा।
इस पूरे मामले में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सामने आई अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और क्या संबंधित अधिकारियों या अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई की जाती है।
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