नक्सली विचारधारा से तौबा कर मुख्यधारा में लौटे 100 से अधिक पूर्व नक्सली आज विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचेंगे।

More than 100 former Naxalites, who have renounced
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नक्सली विचारधारा से तौबा कर मुख्यधारा में लौटे 100 से अधिक पूर्व नक्सली आज विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचेंगे।

नक्सली विचारधारा से तौबा कर मुख्यधारा में लौटे 100 से अधिक पूर्व नक्सली आज विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचेंगे।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक और सकारात्मक पहल के तहत नक्सली विचारधारा को त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौट चुके 100 से अधिक पूर्व नक्सली आज गुरुवार, 27 फरवरी को सुबह 10:30 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचेंगे। यह अवसर न केवल उनके जीवन में आए परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि राज्य में चल रही पुनर्वास और समावेशन नीति की सफलता को भी रेखांकित करता है।

इन सभी पूर्व नक्सलियों ने हिंसा और उग्रवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है और वर्तमान में शासन द्वारा संचालित पुनर्वास योजनाओं के अंतर्गत सामान्य नागरिक जीवन जी रहे हैं। आज विधानसभा की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन उनके लिए लोकतंत्र को नजदीक से समझने और संवैधानिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।

लोकतंत्र से प्रत्यक्ष साक्षात्कार

पूर्व नक्सलियों का यह दौरा केवल एक औपचारिक भ्रमण नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से उनका सीधा परिचय है। विधानसभा की कार्यवाही देखकर वे यह समझ सकेंगे कि जनप्रतिनिधि किस प्रकार जनता की समस्याओं, विकास, कानून-व्यवस्था और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करते हैं। यह अनुभव उन्हें यह एहसास कराएगा कि लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक रास्तों से भी परिवर्तन संभव है, न कि हिंसा और हथियारों के बल पर।

पुनर्वास नीति की सफलता का संकेत

राज्य सरकार द्वारा लागू की गई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत इन पूर्व नक्सलियों को आर्थिक सहायता, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। कई पूर्व नक्सली अब खेती, स्वरोजगार, मजदूरी, छोटे व्यवसाय और सामाजिक कार्यों से जुड़ चुके हैं। आज उनका विधानसभा पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि यदि अवसर और विश्वास दिया जाए, तो भटके हुए लोग भी समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लौट सकते हैं।

समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश

यह पहल उन युवाओं और लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो अब भी नक्सली विचारधारा के प्रभाव में हैं। विधानसभा का यह दौरा यह संदेश देता है कि सरकार और समाज, दोनों, हिंसा छोड़ने वालों को अपनाने और आगे बढ़ने का पूरा अवसर देने के लिए तैयार हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ाव, संवाद और विकास की प्रक्रिया में भागीदारी ही स्थायी समाधान है।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं

पूर्व नक्सलियों के इस दौरे को लेकर प्रशासन द्वारा आवश्यक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्हें निर्धारित समय पर विधानसभा परिसर में प्रवेश कराया जाएगा और दर्शक दीर्घा से कार्यवाही देखने की अनुमति दी जाएगी। इस दौरान उन्हें विधानसभा की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया और सदन की मर्यादाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

एक नई शुरुआत की ओर

आज का यह दिन कई पूर्व नक्सलियों के लिए नई सोच और नई दिशा की शुरुआत साबित हो सकता है। लोकतंत्र के केंद्र में बैठकर शासन की प्रक्रिया को देखना उनके भीतर नागरिक कर्तव्यों और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा। यह कदम छत्तीसगढ़ को नक्सल प्रभावित क्षेत्र से शांति, विकास और विश्वास की ओर ले जाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, 27 फरवरी को होने वाला यह विधानसभा भ्रमण न केवल एक कार्यक्रम है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जिसमें हिंसा के रास्ते से लौटकर लोकतंत्र और विकास की राह चुनी गई है

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