Immediate halt to illegal construction कर्बला तालाब में नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक — वेटलैंड अथॉरिटी का बड़ा कदम, डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
कर्बला तालाब में नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक — वेटलैंड अथॉरिटी का बड़ा कदम, डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
रायपुर, 11 अक्टूबर 2025। छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर जिले के कर्बला तालाब में किए जा रहे और प्रस्तावित निर्माण कार्यों को वेटलैंड (एडवांस्ड लैंड कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट) रूल्स 2017 के विरुद्ध पाते हुए तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए हैं। अथॉरिटी ने रायपुर कलेक्टर को निर्देशित किया है कि नगर निगम रायपुर के आयुक्त को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा जाए। आदेश की प्रति आयुक्त नगर निगम रायपुर को भी भेजी गई है।
मामला क्या है
दरअसल, मई 2023 में छत्तीसगढ़ वेटलैंड अथॉरिटी ने रायपुर कलेक्टर को शहर के प्रमुख तालाबों — कर्बला तालाब, बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध आदि — की जांच कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन कलेक्टर रायपुर ने केवल कर्बला तालाब के लिए जांच दल गठित किया, जिसकी अध्यक्षता वन मंडल अधिकारी रायपुर को दी गई।
जुलाई 2023 में इस जांच दल ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी थी, परंतु यह रिपोर्ट आज तक वेटलैंड अथॉरिटी को नहीं भेजी गई। इस बीच, रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ एवं पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत यह रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त कर ली। सितंबर 2025 में उन्होंने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर बताया कि रिपोर्ट के अनुसार कर्बला तालाब में रु. 1.13 करोड़ के निर्माण कार्य वेटलैंड नियमों के विपरीत प्रस्तावित किए गए थे, जिन पर जांच दल ने रोक की सलाह दी थी।
इसके बावजूद, फरवरी-मार्च 2024 में तालाब के हाईएस्ट फ्लड लेवल (अधिकतम बाढ़ स्तर) से 50 मीटर के भीतर पेवर और अन्य स्थायी निर्माण कराए गए। अब, डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नई रिटेनिंग वॉल और अन्य कार्यों की योजना फिर से बनाई जा रही है, जो कि नियमों के खिलाफ है।
वेटलैंड अथॉरिटी का आदेश
डॉ. गुप्ता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए वेटलैंड अथॉरिटी ने कलेक्टर रायपुर को निर्देश दिया है कि—
1. कर्बला तालाब की जांच रिपोर्ट (जुलाई 2023) तुरंत प्राधिकरण को भेजी जाए।
2. वेटलैंड रूल्स 2017 के तहत प्रतिबंधित गतिविधियां पाए जाने पर नगर निगम रायपुर को तत्काल निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया जाए।
क्या हैं वेटलैंड क्षेत्र में प्रतिबंध
वेटलैंड (आर्द्रभूमि) रूल्स 2017 के अनुसार किसी भी तालाब या झील के 2007 से अब तक के औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल से 50 मीटर के अंदर कोई भी स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता।
इनमें शामिल हैं —
रिटेनिंग वॉल
सड़के या पेवर ब्लॉक
भवन निर्माण
स्थायी पाथवे या संरचना
डॉ. गुप्ता के अनुसार, रायपुर के कर्बला, बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा और महाराजबंध जैसे बड़े जलाशयों का क्षेत्रफल 2.25 हेक्टेयर से अधिक है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पुराने नियम (2010 के) लागू होंगे। इस स्थिति में औसत हाईएस्ट फ्लड लेवल की गणना वर्ष 2000 से की जानी चाहिए।
2023 की जांच में क्या सामने आया
वन मंडल अधिकारी की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि कर्बला जलाशय में पार्किंग, सीसी रोड, रेलिंग मरम्मत, रिटेनिंग वॉल मरम्मत, और प्रसाधन भवन जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। जांच में पाया गया कि इन कार्यों से जलाशय की जल धारण क्षमता कम होगी, जल क्षेत्रफल घटेगा, और स्थानीय जीव-जंतुओं के आवास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया था कि ऐसे कार्य आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 का उल्लंघन करते हैं और इससे तालाब का जल क्षेत्र गैर-आर्द्रभूमि उपयोग में परिवर्तित हो जाएगा।
डॉ. गुप्ता की वेटलैंड अथॉरिटी को सलाह
डॉ. राकेश गुप्ता ने वेटलैंड अथॉरिटी को सुझाव दिया है कि चूंकि कलेक्टर रायपुर बार-बार के रिमाइंडर के बाद भी जांच रिपोर्ट जमा नहीं कर रहे हैं, इसलिए अथॉरिटी स्वयं सूचना का अधिकार (RTI) के तहत यह रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त करे।
साथ ही उन्होंने यह भी अनुशंसा की है कि अथॉरिटी यह भी पूछे कि मई 2023 के आदेश और कई अनुस्मारक के बावजूद बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंध और रायपुर के अन्य तालाबों की जांच अब तक क्यों नहीं की गई है।
मायने
कर्बला तालाब पर हो रहे नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों पर रोक का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेटलैंड क्षेत्रों में नियमों का कठोर पालन नहीं किया गया, तो न केवल शहर के जल स्रोत प्रभावित होंगे बल्कि जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
> डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है — “तालाब केवल जलाशय नहीं हैं, बल्कि ये हमारे शहरों के फेफड़े हैं। इनकी रक्षा करना हर नागरिक और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।”
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