Shyam Bihari Jaiswal's department is corrupt. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का विभाग भ्रष्ट 8 माह पहले सप्लाई हुई पैरासिटामॉल अब निकली खराब, बच्चों की जान से खिलवाड़!

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का विभाग भ्रष्ट 8 माह पहले सप्लाई हुई पैरासिटामॉल अब निकली खराब, बच्चों की जान से खिलवाड़!
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Shyam Bihari Jaiswal's department is corrupt. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का विभाग भ्रष्ट 8 माह पहले सप्लाई हुई पैरासिटामॉल अब निकली खराब, बच्चों की जान से खिलवाड़!

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का विभाग भ्रष्ट 8 माह पहले सप्लाई हुई पैरासिटामॉल अब निकली खराब, बच्चों की जान से खिलवाड़!

रायपुर। प्रदेश में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महासमुंद जिले के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की गई 9आरएम कंपनी की पैरासिटामॉल सस्पेंशन सिरप को अब अमानक (substandard) घोषित किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह दवा अस्पतालों में पिछले आठ महीनों से बच्चों को दी जा रही थी, और अब जाकर विभाग ने इसे असुरक्षित बताया है।

8 महीने बाद जागा विभाग

जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) ने इस दवा की सप्लाई पूरे राज्य में की थी। यह सिरप जुलाई 2024 में निर्मित हुआ था और इसकी एक्सपायरी दिसंबर 2025 बताई गई है। यानी दवा की वैधता अभी भी बाकी थी, लेकिन अब जाकर इसके उपयोग पर रोक लगाई गई है।

इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि दवा अमानक थी, तो विभाग ने आठ महीनों तक जांच क्यों नहीं की? और इतने लंबे समय तक इसका उपयोग जारी क्यों रहा?

स्वास्थ्य विभाग पर घोटाले के आरोप

प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं। विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि "कमीशन के चक्कर में अमानक कंपनियों से दवाइयां खरीदी जा रही हैं"।

विपक्ष का आरोप है कि मलाईदार सौदों के लालच में विभाग ने ऐसी कंपनियों से सौदा किया, जिनकी दवाएं पहले भी मानकों पर खरी नहीं उतरी थीं।

विपक्ष का हमला, सरकार बचाव में

यह मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि “बच्चों की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ अस्वीकार्य है। सरकार बताए कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है?”

वहीं, सूत्रों के अनुसार इस कंपनी से दवा खरीदी के दौरान भारी कमीशन का खेल हुआ है।

लगातार दोहराई जा रही गलती

छत्तीसगढ़ में यह कोई पहला मामला नहीं है जब अमानक दवाओं की खरीद और सप्लाई का मुद्दा सामने आया हो। स्वास्थ्य विभाग में ऐसे कई मामले पिछले वर्षों में भी उजागर हो चुके हैं, लेकिन अब तक किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

सवाल अब यह है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा और दवा की गुणवत्ता की जिम्मेदारी कौन लेगा?

प्रदेश की जनता जवाब मांग रही है, लेकिन विभाग अब भी ‘जांच जारी है’ कहकर पल्ला झाड़ता दिख रहा है।

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