जल जीवन मिशन पर संकट: 5 हजार करोड़ के बकाये से ठेकेदारों में आक्रोश, 15 अक्टूबर को रायपुर में बड़ा आंदोलन

Crisis for Jal Jeevan Mission: Contractors outraged over ₹5,000 crore in outstanding dues; major protest in Raipur on October 15.
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जल जीवन मिशन पर संकट: 5 हजार करोड़ के बकाये से ठेकेदारों में आक्रोश, 15 अक्टूबर को रायपुर में बड़ा आंदोलन

जल जीवन मिशन पर संकट: 5 हजार करोड़ के बकाये से ठेकेदारों में आक्रोश, 15 अक्टूबर को रायपुर में बड़ा आंदोलन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के कामों को लेकर ठेकेदारों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ठेकेदार संघ के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला का दावा है कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत किए गए विभिन्न कार्यों का करीब 5 हजार करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। इसमें मल्टी विलेज स्कीम, रेट्रोफिटिंग, सोलर स्कीम, रनिंग वाटर, एमबीएस तथा ट्यूबवेल खुदाई समेत कई कार्य शामिल हैं।

लंबे समय से भुगतान नहीं होने से नाराज ठेकेदारों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। ठेकेदार संघ के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला के मुताबिक 15 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संघ का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द बकाया राशि का भुगतान नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

पाइपलाइन बिछी, टंकियां बनीं, लेकिन घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाना है। लेकिन भुगतान संबंधी संकट का असर अब योजना की जमीनी स्थिति पर भी दिखाई देने की बात सामने आ रही है।

कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, पानी की टंकियां तैयार हैं और करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन पर्याप्त संचालन और रखरखाव नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ठेकेदारों का कहना है कि जब निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन भुगतान नहीं किया जाता और तैयार सिस्टम का प्रभावी संचालन नहीं हो पाता, तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

भुगतान नहीं मिलने से बैंक कर्ज का दबाव

ठेकेदारों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान अटकने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर होती जा रही है। कई ठेकेदारों ने काम पूरा करने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज लिया था। सरकार से भुगतान नहीं मिलने के कारण वे समय पर बैंक की किस्तें नहीं चुका पा रहे हैं।

ठेकेदार संघ बीरेश शुक्ला का दावा है कि कई ठेकेदार बैंक डिफॉल्ट की स्थिति में पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री, मजदूरों का भुगतान, मशीनरी, डीजल और अन्य खर्चों का भुगतान उन्हें अपनी जेब से करना पड़ा, लेकिन विभागीय भुगतान लंबित रहने से पूरा वित्तीय ढांचा प्रभावित हो गया है।

मंत्री के आश्वासन के बावजूद भुगतान का इंतजार

जल संसाधन एवं लोक निर्माण से जुड़े विभागीय मंत्री अरुण साव की ओर से समय-समय पर लंबित भुगतान जल्द किए जाने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद ठेकेदारों का कहना है कि जमीनी स्तर पर उन्हें अभी तक राहत नहीं मिली है।

यही वजह है कि अब ठेकेदार संघ सरकार से स्पष्ट जवाब और समयबद्ध भुगतान की मांग कर रहा है।

कमीशन के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता

भुगतान में देरी को लेकर ठेकेदारों की ओर से कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि कुछ मामलों में भुगतान के लिए कथित तौर पर कमीशन की मांग की जाती है। उनका कहना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे ठेकेदारों द्वारा कथित कमीशन देने से इनकार किए जाने के बाद भुगतान अटकने की स्थिति बनती है।

हालांकि, कमीशन मांगने के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ठेकेदार संघ के पास इस संबंध में दस्तावेज, शिकायत या अन्य प्रमाण हैं, तो उनकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।

सरकार और ठेकेदारों के बीच बढ़ता टकराव

एक तरफ सरकार जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ भुगतान संकट ने इस पूरी व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

अगर ठेकेदारों का भुगतान नहीं होता है तो नए कामों की रफ्तार प्रभावित होने के साथ-साथ पहले से तैयार योजनाओं के संचालन और रखरखाव पर भी असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है।

चुनाव से पहले सरकार के लिए बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में अभी करीब दो साल का समय है, लेकिन जल जीवन मिशन जैसी सीधे आम जनता से जुड़ी योजना में पैदा हो रहा संकट आने वाले समय में राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

ग्रामीण इलाकों में पानी जैसी मूलभूत सुविधा का सवाल सीधे लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा है। ऐसे में यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं होता है, तो सरकार के लिए इसका जवाब देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सवाल यह है कि जब जल जीवन मिशन के तहत निर्माण कार्यों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, तो ठेकेदारों का इतना बड़ा भुगतान आखिर क्यों अटका हुआ है? क्या सरकार के पास भुगतान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है, या विभागीय स्तर पर कोई दूसरी समस्या है?

15 अक्टूबर का प्रस्तावित आंदोलन अब इस पूरे मामले में सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता दिखाई दे रहा है। ठेकेदारों की मांग, सरकार का जवाब और जमीनी स्तर पर जलापूर्ति की स्थिति—इन तीनों पर आने वाले दिनों में सबकी नजर रहेगी।

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