छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला: रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई और सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ में रहने पर पाबंदी
छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला: रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई और सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, छत्तीसगढ़ में रहने पर पाबंदी
नई दिल्ली/रायपुर – सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले मामले में आरोपी रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई और व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को कड़ी शर्तों के साथ अंतरिम जमानत प्रदान की है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की डबल बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की।
हालांकि, सभी आरोपी अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे, क्योंकि ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ) में दर्ज अन्य मामलों के कारण उनकी रिहाई तत्काल नहीं हो पाएगी।
जमानत की प्रमुख शर्तें:
छत्तीसगढ़ राज्य में रहने पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका के चलते यह शर्त जोड़ी गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी किसी भी तरह से जांच या ट्रायल को प्रभावित न करें।
क्या है कोयला घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन और वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। ईडी का आरोप है कि ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करके, और अन्य गैरकानूनी तरीकों से 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई।
ईडी ने इस घोटाले में 36 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और आरोपियों पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग, धनशोधन और साजिश के आरोप लगाए हैं।
आगे की कार्रवाई:
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाकी मामलों में क्या आरोपी राहत पा पाते हैं, और इस व्यापक घोटाले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। इस केस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं, विशेषकर जब इसमें आईएएस अफसरों और राजनीतिक संबंधों की भी बात सामने आई है।
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