दशकों बाद बस्तर संभाग के दूरस्थ अंचलों में हो रही शासकीय कार्यालयों की पुनः स्थापना

After decades, government offices are being re-established in remote areas of Bastar divisionदशकों बाद बस्तर संभाग के दूरस्थ अंचलों में हो रही शासकीय कार्यालयों की पुनः स्थापना
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दशकों बाद बस्तर संभाग के दूरस्थ अंचलों में हो रही शासकीय कार्यालयों की पुनः स्थापना

दशकों बाद बस्तर संभाग के दूरस्थ अंचलों में हो रही शासकीय कार्यालयों की पुनः स्थापना: बस्तर में बहेगी विकास की धारा

रायपुर- बस्तर संभाग में लगभग तीन दशकों से चला आ रहा नक्सली आतंक अब समाप्ति की ओर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर दिखाई देने लगे हैं। इस परिवर्तन के साथ ही शासन द्वारा लंबे समय से बंद पड़े शासकीय कार्यालयों की पुनः स्थापना प्रारंभ कर दी गई है, जिससे बस्तर के दूरस्थ अंचलों में विकास की धारा बहने लगी है।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग के अधिसूचित मुख्यालयों में पुनः वन विभाग के कार्यालयों की स्थापना की जा रही है। वन विभाग सदैव आदिवासी एवं वनवासी समुदाय को वनों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। नक्सलियों के द्वारा बस्तर संभाग के अंदरूनी क्षेत्रों में स्थापित शासकीय कार्यालयों को निशाना बनाकर व्यापक नुकसान पहुँचाया गया। सुकमा जिले के जगरगुण्डा, गोलापल्ली, किस्टाराम, बीजापुर जिले के गंगालूर एवं पामेड़, तथा नारायणपुर के सोनपुर परिक्षेत्र कार्यालयों को नष्ट किया गया।विश्रामगृहों में तोड़फोड़, काष्ठ कूपों एवं डिपों में आगजनी तथा शासकीय कर्मचारियों पर हमले जैसी घटनाएँ आम हो गई थीं।

इन हमलों में वन विभाग के कई समर्पित कर्मचारी कर्तव्य पालन करते हुए शहीद भी हुए। भय और असुरक्षा के चलते इन सभी कार्यालयों को क्रमशः दोरनापाल, कोन्टा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे सुरक्षित क्षेत्रों से संचालित किया गया, जिससे शासन की पहुंच स्थानीय वनवासी समुदाय से धीरे-धीरे कम होती चली गई। इन कार्यालयों के दूर चले जाने से बस्तर के वनवासी क्षेत्रों में वानिकी कार्य, वन्यजीव सुरक्षा, एवं रोजगार गतिविधियाँ गंभीर रूप से प्रभावित हुईं। लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी 40 से 50 किलोमीटर दूर शहरों के कार्यालयों तक जाना पड़ता था, जिससे समय, श्रम और संसाधनों की भारी बर्बादी होती थी।

छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लगभग 25 वर्षों पश्चात अब जब बस्तर में शांति लौट रही है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने दृढ़ संकल्प के साथ माओवादी आतंक से मुक्ति की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग द्वारा बस्तर के इन अंदरूनी क्षेत्रों में पुनः शासकीय कार्यालयों की स्थापना की जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए सुकमा के जगरगुण्डा, गोलापल्ली, किस्टाराम, बीजापुर के गंगालूर एवं पामेड़, तथा नारायणपुर के सोनपुर परिक्षेत्र कार्यालयों को पुनः स्थापित कर शासकीय कार्यों का संचालन शुरू कर दिया है।

इन कार्यालयों के पुनः संचालन से अब बस्तर के आदिवासी एवं वनवासी समुदाय को लघु वनोपज संग्रहण, काष्ठ कूप विदोहन, वानिकी कार्यों सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे उनके गांवों में मिलने लगा है। साथ ही, वन्य प्राणी एवं जैव विविधता के संरक्षण के प्रयास भी फिर से गति पकड़ चुके हैं। शासकीय कार्यालयों की पुनः स्थापना सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि बस्तर के वनवासियों के आत्मविश्वास की पुनर्प्राप्ति है। यह पहल दर्शाती है कि बस्तर अब सिर्फ संघर्ष की भूमि नहीं, बल्कि शांति, समरसता और सतत विकास की एक नई गाथा लिख रहा है।

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