Tomatoes are expensive in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में टमाटर महंगा: बारिश की मार से घटा उत्पादन, 60 रुपये किलो तक पहुंचे दाम

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Tomatoes are expensive in Chhattisgarh:  छत्तीसगढ़ में टमाटर महंगा: बारिश की मार से घटा उत्पादन, 60 रुपये किलो तक पहुंचे दाम

छत्तीसगढ़ में टमाटर महंगा: बारिश की मार से घटा उत्पादन, 60 रुपये किलो तक पहुंचे दाम

रायपुर/दुर्ग/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में टमाटर की आवक अचानक कम होने से आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगड़ गया है। नवंबर–दिसंबर में जहां टमाटर 10 से 12 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था, वहीं अब इसके दाम 50 से 60 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। कीमतों में इस तेज उछाल की मुख्य वजह बीच मौसम में हुई अचानक बारिश बताई जा रही है, जिससे टमाटर की फसल को भारी नुकसान हुआ है।

किसानों के अनुसार, बारिश ने खेतों में लगे टमाटर के पौधों को बुरी तरह प्रभावित किया। कई जगहों पर पौधे पूरी तरह खराब हो गए, जबकि जो पौधे बचे भी हैं, उनमें फलन अपेक्षित स्तर का नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है और बाजार में स्थानीय टमाटर की आवक तेजी से घट गई है।

उत्पादन आधा, नुकसान दोगुना

राज्य के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों—दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के इलाकों—में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। किसानों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में एक एकड़ से करीब 400 कैरेट टमाटर का उत्पादन होता था, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 200 कैरेट रह गया है। कम उत्पादन के कारण किसानों को जहां एक ओर नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं।

किसानों ने बताया कि बारिश के कारण मिट्टी में नमी अधिक हो गई, जिससे पौधों में फंगल रोग और सड़न की समस्या बढ़ी। कई खेतों में टमाटर के फूल झड़ गए और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। कुछ क्षेत्रों में तो पूरी फसल ही नष्ट हो गई।

दक्षिण भारत से हो रही आपूर्ति

स्थानीय आवक कम होने के बाद छत्तीसगढ़ की सब्जी मंडियों में अब दक्षिण भारत के राज्यों से टमाटर मंगाया जा रहा है। विशेष रूप से कर्नाटक से रोजाना करीब 50 ट्रक टमाटर प्रदेश में पहुंच रहे हैं। हालांकि, लंबी दूरी से आने के कारण परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका असर सीधे खुदरा कीमतों पर पड़ता है।

व्यापारियों का कहना है कि मांग के मुकाबले आपूर्ति अभी भी कम है। यही वजह है कि पर्याप्त ट्रक आने के बावजूद कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिल पा रही है। थोक मंडियों में भाव ऊंचे बने हुए हैं, जिससे खुदरा बाजार में दाम 60 रुपये किलो तक पहुंच रहे हैं।

जेब पर भारी पड़ रही महंगाई

टमाटर की बढ़ी कीमतों ने आम जनता की जेब ढीली कर दी है। होटल, ढाबे और छोटे भोजनालय भी बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। कई जगहों पर टमाटर की मात्रा कम कर दी गई है या मेन्यू में बदलाव किया जा रहा है। गृहणियों का कहना है कि रोजमर्रा की सब्जी होने के कारण टमाटर के बिना काम चलाना मुश्किल है, लेकिन महंगे दामों ने बजट बिगाड़ दिया है।

फरवरी तक इंतजार

किसानों के मुताबिक, नुकसान के बाद नए पौधे लगाए गए हैं, लेकिन उनकी फसल आने में अभी समय लगेगा। अनुमान है कि फरवरी–मार्च तक ही स्थानीय टमाटर की आवक दोबारा सामान्य हो पाएगी। यदि मौसम अनुकूल रहा तो तब जाकर कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में टमाटर के दाम और बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

कुल मिलाकर, अचानक हुई बारिश ने छत्तीसगढ़ में टमाटर उत्पादन की कमर तोड़ दी है। जब तक स्थानीय फसल बाजार में नहीं आती, तब तक उपभोक्ताओं को महंगे टमाटर से ही काम चलाना पड़ेगा।

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