rehabilitation in Bastar is dispelling बस्तर में पुनर्वास की रोशनी से मिट रहा भय का अंधकार संवाद, संवेदना और विश्वास की नई धरती बन रहा है बस्तर
बस्तर में पुनर्वास की रोशनी से मिट रहा भय का अंधकार
संवाद, संवेदना और विश्वास की नई धरती बन रहा है बस्तर
रायपुर, 29 अक्टूबर 2025। राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ ने बस्तर अंचल में एक नई सामाजिक क्रांति की शुरुआत की है। इन नीतियों के परिणामस्वरूप माओवाद की हिंसक विचारधारा से प्रभावित युवाओं में नया विश्वास जागा है और वे मुख्यधारा में लौटकर विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
बीजापुर जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्ज़ीवन” अभियान के तहत सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों से कुल ₹66 लाख के इनामी 51 माओवादी आज आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है।
यह परिवर्तन इस बात का प्रतीक है कि बस्तर अब भय और हिंसा के अंधकार से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और प्रगति के नए युग में प्रवेश कर रहा है। शासन की संवेदनशील नीतियाँ और मानवीय दृष्टिकोण इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई हैं। सरकार का मानना है कि संवाद ही समस्या का स्थायी समाधान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश अब नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।
सरकार ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस परिवर्तन की यात्रा में सहभागी बनें, ताकि छत्तीसगढ़ का हर गाँव शांति, प्रगति और समरसता का प्रतीक बन सके।
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