The lack of healthcare facilities कबीरधाम जिले के कवर्धा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है।
कबीरधाम जिले के कवर्धा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। सामाजिक सरोकारों से जुड़े चिकित्सक डॉ. संजय श्रीवास्तव ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से सार्वजनिक रूप से मांग की है कि जिले के दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए। डॉ. श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया के माध्यम से शासन से निवेदन करते हुए कहा है कि यदि सरकार इन बुनियादी जरूरतों पर गंभीरता से ध्यान दे, तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल सुदृढ़ होगी बल्कि और अधिक प्रभावी व “सुंदर” भी बन सकेगी।
डॉ. संजय श्रीवास्तव ने विशेष रूप से बोड़ला विकासखंड की स्थिति को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले के इसी एकमात्र ब्लॉक में PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) के 226 गांव स्थित हैं। ये गांव भौगोलिक रूप से दुर्गम हैं, जहां आज भी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवार नियमित व समुचित इलाज से वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शासन द्वारा इन गांवों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए मेडिकल मोबाइल यूनिट्स और आयुष मेडिकल मोबाइल यूनिट्स का संचालन किया जा रहा है, जो एक सराहनीय प्रयास है। इन मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं और आयुष आधारित उपचार कुछ हद तक ग्रामीणों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि, डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि इतनी बड़ी जनसंख्या और 226 गांवों के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, वर्तमान में बोड़ला ब्लॉक में केवल चार आयुष औषधालय संचालित हैं—जुनवानी, मड़मड़ा, पोड़ी और चिल्फी। इतने सीमित औषधालयों के कारण दूर-दराज के गांवों में रहने वाले PVTG समुदाय के लोगों को इलाज के लिए कई किलोमीटर पैदल या साधनों के अभाव में कठिन यात्रा करनी पड़ती है। इससे न केवल इलाज में देरी होती है, बल्कि कई बार गंभीर बीमारियों की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।
इसी पृष्ठभूमि में डॉ. संजय श्रीवास्तव ने शासन से मांग की है कि बोड़ला ब्लॉक के कम से कम 20 और गांवों में नए आयुष औषधालय खोले जाएं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ये औषधालय केवल नाम मात्र के न हों, बल्कि औषधि, मानव संसाधन और सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त हों। प्रशिक्षित आयुष चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता और बुनियादी जांच सुविधाएं इन केंद्रों में सुनिश्चित की जाएं।
डॉ. श्रीवास्तव का मानना है कि यदि यह मांग पूरी होती है, तो PVTG गांवों के निवासियों को बेहतर, सुलभ और भरोसेमंद आयुष चिकित्सा उपलब्ध हो सकेगी। आयुष पद्धतियां—जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—इन क्षेत्रों में पहले से ही लोगों की जीवनशैली और परंपराओं के अधिक अनुकूल हैं, जिससे इनका प्रभाव और स्वीकार्यता भी अधिक रहती है।
उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा, बल्कि आदिवासी समाज के प्रति शासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगा। साथ ही, इससे प्राथमिक स्तर पर ही कई बीमारियों का उपचार संभव होगा, जिससे बड़े अस्पतालों पर दबाव भी कम होगा।
कुल मिलाकर, डॉ. संजय श्रीवास्तव की यह पहल स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी सुझाव के रूप में देखी जा रही है। अब देखना होगा कि शासन इस मांग पर कितनी शीघ्रता और गंभीरता से निर्णय लेता है, ताकि कबीरधाम जिले के PVTG गांवों को एक मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य ढांचा मिल सके।
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