विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन नशे के अवैध कारोबार पर हंगामा, भाजपा विधायकों ने प्रशासन को घेरा
विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन नशे के अवैध कारोबार पर हंगामा, भाजपा विधायकों ने प्रशासन को घेरा
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और बढ़ते नशे के कारोबार को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। आज ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों ने ही अपनी सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है और इसे रोकने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। हालांकि, गृह मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार की कार्रवाई को प्रभावी बताया।
ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक ने नशे के बढ़ते मामलों को लेकर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई इलाकों में नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है। खासतौर पर बिलासपुर और रायपुर के कुछ क्षेत्रों में हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं।
अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि नशे के कारोबार से जुड़े अपराधी अब हाईटेक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने एक हालिया मामले का जिक्र करते हुए बताया कि गांजा की पैकिंग और पैकेजिंग करने वाले एक गिरोह के पास अत्याधुनिक कैमरे मिले थे, जिनके जरिए उन्हें पुलिस की गतिविधियों की पूर्व सूचना मिल जाती थी। इससे यह साफ होता है कि नशे के कारोबारियों का नेटवर्क कितना संगठित और मजबूत हो चुका है।
चंद्राकर ने आगे आरोप लगाया कि इस अवैध धंधे में पुलिस महकमे के निचले स्तर के कर्मचारियों, यहां तक कि आरक्षकों तक की संलिप्तता सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि जब कानून के रखवाले ही अपराधियों को संरक्षण देंगे तो अपराध का बढ़ना स्वाभाविक है। इस स्थिति ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा विधायकों के इन आरोपों पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि प्रशासन के फेल होने के आरोप निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार और सख्त कार्रवाई कर रही है। गृह मंत्री ने रायपुर के टिकरापारा क्षेत्र में एक आरक्षक पर हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मामला इस बात का प्रमाण है कि सरकार दोषियों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटती।
विजय शर्मा ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और सरकार इस पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा।
हालांकि, अजय चंद्राकर ने गृह मंत्री के जवाब से असंतोष जताते हुए कहा कि जब वे विपक्ष में थे, तब भी उन्होंने यही मुद्दा उठाया था, लेकिन आज स्थिति और अधिक भयावह हो चुकी है। उन्होंने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि प्रशासन पूरी तरह फेल नजर आ रहा है और जमीनी हकीकत सरकार के दावों से अलग है।
सदन में उठे इस मुद्दे ने भाजपा के भीतर ही असहज स्थिति पैदा कर दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब सत्तारूढ़ दल के विधायक ही अपनी सरकार और प्रशासन पर इतने गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो क्या यह भाजपा के अंदरूनी मतभेदों का संकेत है? क्या मंत्री, विधायक और संगठन के बीच तालमेल की कमी सामने आ रही है? या फिर यह सरकार के लिए आत्ममंथन का अवसर है?
फिलहाल, नशे के बढ़ते कारोबार पर विधानसभा में हुई इस बहस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों के बाद जमीनी स्तर पर कितनी सख्त और प्रभावी कार्रवाई करती है और क्या नशे के खिलाफ लड़ाई वास्तव में निर्णायक मोड़ ले पाती है
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