Kawardha's #MeToo case कवर्धा के ‘मी टू’ मामले से मचा भूचाल, पूर्व भूपेश सरकार के खुफिया विभाग से जुड़े आईपीएस पर उठे सवाल?
कवर्धा के ‘मी टू’ मामले से मचा भूचाल, पूर्व भूपेश सरकार के खुफिया विभाग से जुड़े आईपीएस पर उठे सवाल
रायपुर/कवर्धा। छत्तीसगढ़ की पुलिस सेवा इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में खुफिया विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी इन दिनों गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं। बताया जा रहा है कि उनका कवर्धा शहर से गहरा नाता रहा है — वे अक्सर यहां के एक निजी लॉज, जो पहले सुप्रित लॉज के नाम से जाना जाता था और वर्तमान में सेलेब्रेशन लॉज कहलाता है, में ठहरते थे।
हाल के दिनों में इसी लॉज से जुड़ी “मी टू” कहानी पूरे कवर्धा से लेकर राजधानी रायपुर तक चर्चा का विषय बन गई है। पुलिस और प्रशासनिक हलकों में यह मामला तेजी से तूल पकड़ रहा है। आईएएस और आईपीएस लॉबी में अब यही सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर “मी टू” की यह कहानी क्या है और इसमें कौन-कौन शामिल है?
शहजादी और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की कहानी
सूत्रों के अनुसार, संबंधित महिला अधिकारी को पूर्व सरकार के दौरान “आउट ऑफ टर्न प्रमोशन” देकर पुलिस विभाग में ऊंचा पद मिला। विभागीय हलकों में चर्चा है कि यह प्रमोशन योग्यता के बजाय “प्रभाव” के आधार पर दिया गया था। महिला अधिकारी के साथ-साथ उनके करीबी अधिकारी—जिन्हें स्थानीय लोग “शहजादे” के नाम से जानते हैं—को भी कई महत्वपूर्ण थानों की कमान सौंपी गई। बताया जाता है कि इन पदों पर रहते हुए विभागीय मलाई खाने के आरोप लगातार उठते रहे।
डांगी केस से उठे नए सवाल
मामले की चर्चा तब और बढ़ी जब वरिष्ठ आईपीएस रतनलाल डांगी पर एक महिला ने गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इसके जवाब में डांगी ने पुलिस मुख्यालय में आवेदन देकर दावा किया कि वे पिछले सात वर्षों से “ब्लैकमेलिंग” के शिकार हैं। सवाल यह उठ रहा है कि अगर ऐसा था, तो इतने वर्षों तक उन्होंने शिकायत क्यों नहीं की?
मामला तब और जटिल हो गया जब इस जांच की जिम्मेदारी एक अन्य वरिष्ठ आईपीएस को सौंपी गई—जो खुद अब आरोपों के घेरे में हैं। जांचकर्ता बनने वाले ये अधिकारी कवर्धा में अपने पुराने “मी टू” संबंधों को लेकर चर्चा में हैं। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तंज कसा जा रहा है—“बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुहान अल्लाह।”
कवर्धा से रायपुर तक गूंज
कवर्धा जिला, जो प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा का गृह जिला भी है, अब इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। जहां एक ओर गृहमंत्री नक्सल उन्मूलन की सफलता का श्रेय ले रहे हैं, वहीं उनके ही जिले में पुलिस विभाग से जुड़े इस तरह के प्रकरण सरकार की छवि पर धब्बा डाल रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, संबंधित आईपीएस अधिकारी का नाम महादेव सट्टा ऐप घोटाले से भी जोड़ा जा रहा है। आरोप है कि उन्होंने इस ऐप से जुड़े लोगों से करोड़ों रुपये की “मलाई” खाई और जांच को प्रभावित किया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
सरकारी संरक्षण पर उठ रहे सवाल
राजधानी रायपुर में पुलिस मुख्यालय और मंत्रालय दोनों जगह यह चर्चा है कि उक्त अधिकारी को सीएम हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि उन पर कार्रवाई की संभावना नगण्य मानी जा रही है। विभाग के अंदरखाने में भी यह बात फैल चुकी है कि “मामला भले उजागर हो गया हो, लेकिन सजा किसी को नहीं मिलेगी।”
सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा मामला
छत्तीसगढ़ सरकार के लिए यह मामला अब चुनौती का रूप ले चुका है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री ने हाल ही में “जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन और महिला सम्मान” की नीति की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस महकमे में रंगीन मिजाज और भ्रष्टाचार के आरोप बढ़ते जा रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि सरकार ने इस मामले में पारदर्शी जांच नहीं कराई, तो यह न केवल पुलिस महकमे की साख पर सवाल उठाएगा बल्कि सत्ता की छवि पर भी गहरा धब्बा छोड़ जाएगा।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध सूत्रों और चर्चाओं पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी ज्यादा जानकारी लिए लाज मालिक और कवर्धा के लोगो संपर्क कर सकते है।
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