ब्लड कैंसर से जूझ रही है दसवीं की टॉपर, रोग को भी मात देकर रोल मॉडल बनेगी इशिका

Class 10 topper is battling blood cancer, Ishika will become a role model by defeating the disease ब्लड कैंसर से जूझ रही है दसवीं की टॉपर, रोग को भी मात देकर रोल मॉडल बनेगी इशिका
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ब्लड कैंसर से जूझ रही है दसवीं की टॉपर, रोग को भी मात देकर रोल मॉडल बनेगी इशिका

बहादुर बेटी से हारेगा कैंसर ब्लड कैंसर से जूझ रही है दसवीं की टॉपर, रोग को भी मात देकर रोल मॉडल बनेगी इशिका  

रायपुर : बुधवार को हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल के रिजल्ट घोषित हुए। दसवीं में पूरे प्रदेश में पहले नंबर पर आई कांकेर की इशिका बाला। इशिका को 99.17 फीसदी नंबर मिले। यह रिजल्ट इसलिए खास नहीं है क्योंकि कांकेर जैसे छोटे से इलाके पढकर इशिका ने पहला मुकाम हासिल किया है। बल्कि इसलिए खास है कि पहला मुकाम हासिल करने वाली इशिका कोई मामूली लड़की नहीं है। इशिका एक योद्धा है जो दो मोर्चों पर एक साथ जंग लड़ रही है। एक तो उसकी पढ़ाई है जिसमें वो अव्वल आई है और दूसरा मोर्चा है उसकी बीमारी। बीमारी भी कोई छोटी मोटी नहीं बल्कि ब्लड कैंसर की। ब्लड कैंसर से लड़ाई लड़ते हुए इशिका ने यह स्थान हासिल किया है,जिस पर गर्व है। ईश्वर की कृपा और लोगों की दुआओं के सहारे हम उम्मीद करते हैं कि इशिक इसी बहादुरी से रोग को मात देगी और मेहनत,जीवटता और लगन की नई रोल मॉडल बनेगी। 

किसान की बेटी है इशिका : 

मेरिट लिस्ट में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली इशिका बाला कांकेर जिले के परलकोट पीवी नंबर 51 की रहने वाली है। उनके पिता का नाम शंकर बाला और माता का नाम इति बाला है। इशिका कोयलीबेडा विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोंडाहुर की छात्रा है। इशिका के पिता सामान्य से छोटे किसान हैं। इशिका पिछले दो सालों से बल्ड कैंसर से जूझ रही है। कैंसर की बीमारी के चलते पिछले साल इशिका दसवीं की परीक्षा नहीं दे पाई थी। परीक्षा के दौरान उसका इलाज चल रहा था इसलिए वह परीक्षा देने से चूक गई। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही इशिका परीक्षा न देने के कारण पूरी तरह मायूस हो उठी थी। लेकिन माता-पिता से यह मायूसी देखी नहीं गई। उन्होंने एक बार फिर इशिका को परीक्षा दिलाने की ठानी। शिक्षकों की प्रेरणा और हौसला अफजाई से इशिका फिर से परीक्षा की तैयारी में जुट गई। 

इलाज के साथ पढ़ाई भी : 

इशिका एक साथ दो मोर्चे पर लड़ाई लड़ रही थी। बीमारी उसके शरीर को कमजोर कर रही थी तो उसका जज्बा उसके मन को मजबूत बना रहा था। इस सत्र में परीक्षा के साथ– साथ कैंसर बीमारी से भी दो-दो हाथ करते हुए परीक्षा की तैयारी में जुट गई। इशिका इलाज भी करवाती रही और पढ़ाई भी करती रही। बीमारी के परिणामों को छोड़ इशिका पूरी तरह सकारात्मक रह दसवीं बोर्ड के अपने लक्ष्य के लिए समर्पित हो तकलीफ और दर्द के बीच भी पढ़ती रही। और जब परिणाम सामने आया तो बहादुर बेटी ने पूरे प्रदेश में टॉप किया। टॉप करने पर इशिका के स्कूल के प्राचार्य और अन्य शिक्षक–शिक्षिकाओं ने भारी खुशी जताई। साथ ही इशिका के जल्द से जल्द ठीक होने की ईश्वर से कामना की । इशिका के माता पिता बेटी की इस कामयाबी से फूले नहीं समा रहे हैं। उसकी कामयाबी की कहानी कहते कहते उनकी आंखें भर आती हैं। अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि इशिका जल्द ठीक हो और पढ़ाई की नई बुलंदियों को छुए।

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